Wednesday, December 12, 2012

विदेह भाषा सम्मान 2012-13 अनुवाद पुरस्कार 2013, युवा पुरस्कार 2012 आ 2013 फेलो (समग्र योगदान) क लेल विदेह सम्मानक घोषणा




विदेह भाषा सम्मान 2012-13
अनुवाद पुरस्कार 2013, युवा पुरस्कार 2012 आ 2013 फेलो (समग्र योगदान) क लेल विदेह सम्मानक घोषणा
2013 फेलो (समग्र योगदान)क विदेह सम्मान- श्री राजनन्दन लालदास केँ।
युवा पुरस्कार 2012- श्रीमति ज्योति सुनीत चौधरीकेँ अर्चिस कविता-हाइकू संग्रह लेल।
अनुवाद पुरस्कार 2013- श्री नरेश कुमार विकलकेँ मराठी उपन्यास ययातिक मैथिली अनुवाद लेल।
मूल पुरस्कार 2012 आ बाल साहित्य पुरस्कार 2012 लेल विदेह सम्मानक घोषणा पहिनहिये भ’ गेल अछि।

विदेह भाषा सम्मान २०१२-१३ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध)

1.
विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार 2012
2012 श्री राजनन्दन लाल दास (समग्र योगदान लेल)
2.विदेह भाषा सम्मान २०१२-१३ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध)
२०१२ बाल साहित्य पुरस्कार - श्री जगदीश प्रसाद मण्डल केँ तरेगन” बाल प्रेरक विहनि कथा संग्रह
२०१२ मूल पुरस्कार - श्री राजदेव मण्डलकेँ "अम्बरा" (कविता संग्रह) लेल।
2012 युवा पुरस्कार- श्रीमती ज्योति सुनीत चौधरीक अर्चिस” (कविता संग्रह)
2013 अनुवाद पुरस्कार- श्री नरेश कुमार विकल "ययाति" (मराठी उपन्यास श्री विष्णु सखाराम खाण्डेकर)



विदेह सम्मान


"ऐ मासक सभसँ नीक समदिया" 
नवम्बर २०१२ क सभसँ नीक समदिया - श्री    सुजीत कुमार झा  - नवम्बर  २०१२  क सभसँ नीक समदिया श्री सुजीत कुमार झा  केँ चुनल गेल छन्हि। हुनका ई सम्मान हुनकर पोस्ट http://esamaad.blogspot.in/2012/11/blog-post_6685.html लेल देल गेल अछि ।
अक्टूबर  २०१२ क सभसँ नीक समदिया - श्री    प्रभात राय भट्ट  - अक्टूबर  २०१२  क सभसँ नीक समदिया श्री प्रभात राय भट्ट केँ चुनल गेल छन्हि। हुनका ई सम्मान हुनकर पोस्ट http://esamaad.blogspot.in/2012/10/blog-post_14.html लेल देल गेल अछि ।

सितम्बर  २०१२ क सभसँ नीक समदिया - श्री    कैलाश कुमार दास  - सितम्बर  २०१२  क सभसँ नीक समदिया श्री      कैलाश कुमार दास केँ चुनल गेल छन्हि। हुनका ई सम्मान हुनकर पोस्ट http://esamaad.blogspot.in/2012/09/blog-post_9114.html लेल देल गेल अछि ।

अगस्त २०१२ क सभसँ नीक समदिया - श्री   देवेन्दु कुमार झा  - अगस्त २०१२  क सभसँ नीक समदिया श्री     देवेन्दु कुमार झा  केँ चुनल गेल छन्हि। हुनका ई सम्मान हुनकर पोस्ट http://esamaad.blogspot.in/2012/08/blog-post_656.html लेल देल गेल अछि ।

जुलाइ २०१२ क सभसँ नीक समदिया - श्री   सुजीत कुमार झा  - जुलाइ २०१२  क सभसँ नीक समदिया श्री     सुजीत कुमार झा  केँ चुनल गेल छन्हि। हुनका ई सम्मान हुनकर पोस्ट http://esamaad.blogspot.in/2012/07/blog-post_6412.html लेल देल गेल अछि ।

जून २०१२ क सभसँ नीक समदिया - श्री   रूपेश कुमार झा "त्योँथ" -  जून २०१२  क सभसँ नीक समदिया श्री    रूपेश कुमार झा "त्योँथ"  केँ चुनल गेल छन्हि। हुनका ई सम्मान हुनकर पोस्ट http://esamaad.blogspot.in/2012/06/blog-post_04.html लेल देल गेल अछि ।

मइ २०१२ क सभसँ नीक समदिया - श्री  अमरनाथ झा -  मइ २०१२  क सभसँ नीक समदिया श्री   अमरनाथ  झा   केँ चुनल गेल छन्हि। हुनका ई सम्मान हुनकर पोस्ट http://esamaad.blogspot.in/2012/05/blog-post_21.html लेल देल गेल अछि ।

अप्रैल २०१२ क सभसँ नीक समदिया - श्री  नवेन्दु कुमार झा -  अप्रैल  २०१२  क सभसँ नीक समदिया श्री  नवेन्दु कुमार झा   केँ चुनल गेल छन्हि। हुनका ई सम्मान हुनकर पोस्ट http://esamaad.blogspot.in/2012/04/blog-post_389.html लेल देल गेल अछि ।


मार्च २०१२ क सभसँ नीक समदिया - श्री आशीष अनचिन्हार -  मार्च २०१२  क सभसँ नीक समदिया-  मार्च २०१२   क सभसँ नीक समदिया  श्री आशीष अनचिन्हार  केँ चुनल गेल छन्हि। हुनका ई सम्मान हुनकर पोस्ट http://esamaad.blogspot.in/2012/03/blog-post_8433.html लेल देल गेल अछि ।


फरबरी २०१२ क सभसँ नीक समदिया श्री सरफराज सिद्दीक पप्पू फरबरी २०१२ क सभसँ नीक समदिया- फरबरी २०१२ क सभसँ नीक समदिया श्री सरफराज सिद्दीक पप्पूकेँ चुनल गेल छन्हि। हुनका ई सम्मान हुनकर पोस्ट http://esamaad.blogspot.in/2012/02/blog-post_05.html लेल देल गेल अछि।

जनवरी २०१२ क सभसँ नीक समदिया नवेन्दु कुमार झा
जनवरी २०१२ क सभसँ नीक समदिया-  नवेन्दु कुमार झा केँ चुनल गेल छन्हि। हुनका ई सम्मान हुनकर पोस्ट http://esamaad.blogspot.in/2012/01/blog-post_3943.html लेल देल गेल अछि।


दिसम्बर २०११ क सभसँ नीक समदिया राम भरोस कापड़ि भ्रमर
दिसम्बर २०११ क सभसँ नीक समदिया- राम भरोस कापड़ि भ्रमरकेँ चुनल गेल छन्हि। हुनका ई सम्मान हुनकर पोस्ट http://esamaad.blogspot.com/2011/12/blog-post_4671.html लेल देल गेल अछि।


नवम्बर २०११ क सभसँ नीक समदिया विनीत उत्पल
नवम्बर २०११ क सभसँ नीक समदिया- विनीत उत्पलकेँ चुनल गेल छन्हि। हुनका ई सम्मान हुनकर पोस्ट http://esamaad.blogspot.com/2011/11/vinit-utpals-rti-application-dated.html लेल देल गेल अछि।



अक्टूबर २०११ क सभसँ नीक समदिया एक बेर फेरसँ नवेन्दु कुमार झा
अक्टूबर  २०११ क सभसँ नीक समदिया- एक बेर फेरसँ नवेन्दु कुमार झाकेँ चुनल गेल छन्हि। हुनका ई सम्मान हुनकर पोस्ट  http://esamaad.blogspot.com/2011/10/blog-post_14.html लेल देल गेल अछि।



सितम्बर २०११ क सभसँ नीक समदिया-नवेन्दु कुमार झा
सितम्बर  २०११ क सभसँ नीक समदिया- नवेन्दु कुमार झाकेँ चुनल गेल छन्हि। हुनका ई सम्मान हुनकर पोस्ट  http://esamaad.blogspot.com/2011/09/blog-post_01.html लेल देल गेल अछि।



अगस्त २०११ क सभसँ नीक समदिया- उदय चटर्जी
अगस्त २०११ क सभसँ नीक समदिया- उदय चटर्जीकेँ चुनल गेल छन्हि। हुनका ई सम्मान हुनकर मिथिलाक विकाससँ सम्बन्धित समाद http://esamaad.blogspot.com/2011/08/blog-post_26.html लेल देल गेल छन्हि।



विदेह सम्मान
-मैथिली नाटक/ संगीत/ कला/ मूर्तिकला/ फिल्मक समानान्तर दुनियाँक अभिलेखन आ सम्मान सेहो हएत विदेह सम्मानक घोषणा द्वारा

-ई घोषणा दिसम्बरक अन्त वा जनवरी २०१३ मे हएत
-मैथिली नाटक/ संगीत/ कला/ मूर्तिकला/ फिल्मक समानान्तर दुनियाँक अभिलेखन आ सम्मान कएल जाएत
-विदेह नाट्य उत्सव २०१३ क अवसरपर प्रदान कएल जाएत ई सम्मान।"

विदेह सम्मान

["पूनम मंडल आ प्रियंका झाक मैथिली न्यूज पोर्टल।

-अगस्त २०११ सँ सभ मास "ऐ मासक सभसँ नीक समदिया" सम्मानक घोषणा कएल जा रहल अछि

-समदिया- पूनम मंडल आ प्रियंका झाक मैथिली न्यूज पोर्टल। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक-सूचना-सम्पर्क-समाद पूनम मंडल आ प्रियंका झा। - द्वारा "ऐ मासक सभसँ नीक समदिया"क घोषणा सभ मास भऽ रहल अछि

- सालक अन्तमे "सर्वश्रेष्ठ मैथिली पत्रकारिता" लेल ऐ १२ टा देल सम्मानमे सँ सर्वश्रेष्ठ "श्री नवेन्दु कुमार झा" केँ पहिल "विदेह पत्रकारिता सम्मान" देल जएबाक घोषणा भेल।

-अगस्त २०१३ मे हएत दोसर "विदेह पत्रकारिता सम्मान"क घोषणा।

विदेह सम्मान
समदिया- पूनम मंडल आ प्रियंका झाक मैथिली न्यूज पोर्टल।विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक-सूचना-सम्पर्क-समाद पूनम मंडल आ प्रियंका झा।

अपन इलाकाक कोनो समाचार ऐ अन्तर्जाल (http://esamaad.blogspot.com/)पर देबा लेल , समाचार poonamberma@gmail.com वा priyanka.rachna.jha@gmail.com पर पठाउ वा एतए http://www.facebook.com/groups/samadiya/ फेसबुकपर राखू।"]

नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्यता (नेपाल देशक भाषा-साहित्य,  दर्शन, संस्कृति आ सामाजिक विज्ञानक क्षेत्रमे  सर्वोच्च सम्मान)

नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्यता
श्री राम भरोस कापड़ि 'भ्रमर' (2010)
श्री राम दयाल राकेश (1999)
श्री योगेन्द्र प्रसाद यादव (1994)

नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान मानद सदस्यता
स्व. सुन्दर झा शास्त्री

नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान आजीवन सदस्यता
श्री योगेन्द्र प्रसाद यादव



फूलकुमारी महतो मेमोरियल ट्रष्ट काठमाण्डू, नेपालक सम्मान
फूलकुमारी महतो मैथिली साधना सम्मान २०६७ - मिथिला नाट्यकला परिषदकेँ
फूलकुमारी महतो मैथिली प्रतिभा पुरस्कार २०६७ - सप्तरी राजविराजनिवासी श्रीमती मीना ठाकुरकेँ
फूलकुमारी महतो मैथिली प्रतिभा पुरस्कार २०६७ -बुधनगर मोरङनिवासी दयानन्द दिग्पाल यदुवंशीकेँ

साझा पुरस्कार (नेपालक साझा संस्थानक पुरस्कार) साझा लोकसंस्कृति पुरस्कार
-वि.सं. २०६७ प्राज्ञ रामभरोस कापड़ि भ्रमर

विद्यापति पुरस्कार कोषक पुरस्कार- मैथिली भाषा, साहित्य, कला संस्कृतिक लेल नेपाल सरकार द्वारा स्थापित नेपालमे सभसँ बड़का राशिक पुरस्कार। 

विद्यापति पुरस्कार कोषक लेल विभिन्न पाँच विद्यामे २०१२ (२०६८ कातिक १८ गते नेपाल सरकार एक करोड रुपैयाक विद्यापति पुरस्कार कोषक स्थापना कएने छल, तकरा बाद र्इ पुरस्कार पहिल वेर देल जा रहल अछि।)
दु लाखक नेपाल विद्यापति मैथिली भाषा साहित्य पुरस्कार मैथिलीक वरिष्ठ साहित्यकार डा. राजेन्द्र विमलकेँ।
एक लाखक नेपाल विद्यापति मैथिली कला संस्कृति पुरस्कार शहीद रंजु झाकेँ
एक लाखक नेपाल विद्यापति मैथिली अनुसन्धान पुरस्कार डा. रामावतार यादवकेँ
एक लाखक नेपाल विद्यापति मैथिली पाण्डुलिपी पुरस्कार साहित्यकार परमेश्वर कापडिकेँ
एक लाखक नेपाल विद्यापति मैथिली अनुबाद पुरस्कार डा. रामदयाल राकेशकेँ
.........
2012 क विद्यापति स्मृति दिवसक अवसरपर नेपाल सरकार द्वारा गठित विद्यापति पुरस्कार कोषक पुरस्कार सभक घोषणा -दू लाखक विद्यापति पुरस्कार रामभरोस कापड़ि भ्रमरकेँ -एक एक लाखक चारिटा पुरस्कार- मैथिली कला संस्कृति पुरस्कार महेन्द्र मलंगियाकेँ, मैथिली अनुसंधान पुरस्कार डा. योगेन्द्र प्रसाद यादवकेँ, मैथिली अनुवाद पुरस्कार पंडित सूर्यकान्त झा आ मैथिली पाण्डुलिपि पुरस्कार विराटनगरक राम नारायण सुधाकरकेँ।

साहित्य अकादेमी  फेलो- भारत देशक सर्वोच्च साहित्य सम्मान (मैथिली)


           १९९४-नागार्जुन (स्व. श्री वैद्यनाथ मिश्र “यात्री” १९११-१९९८ ) , हिन्दी आ मैथिली कवि।


           २०१०- चन्द्रनाथ मिश्र अमर (१९२५- ) - मैथिली साहित्य लेल।



साहित्य अकादेमी भाषा सम्मान ( क्लासिकल आ मध्यकालीन साहित्य आ गएर मान्यताप्राप्त भाषा लेल):-
           
           २०००- डॉ. जयकान्त मिश्र (क्लासिकल आ मध्यकालीन साहित्य लेल।)
           २००७- पं. डॉ. शशिनाथ झा (क्लासिकल आ मध्यकालीन साहित्य लेल।)
            पं. श्री उमारमण मिश्र


साहित्य अकादेमीक टैगोर साहित्य पुरस्कार

२०११- जगदीश प्रसाद मण्डल (गामक जिनगी, लघु कथा संग्रह)


साहित्य अकादेमी पुरस्कार- मैथिली


१९६६- यशोधर झा (मिथिला वैभव, दर्शन)

१९६८- यात्री (पत्रहीन नग्न गाछ, पद्य)

१९६९- उपेन्द्रनाथ झा “व्यास” (दू पत्र, उपन्यास)

१९७०- काशीकान्त मिश्र “मधुप” (राधा विरह, महाकाव्य)

१९७१- सुरेन्द्र झा “सुमन” (पयस्विनी, पद्य)

१९७३- ब्रजकिशोर वर्मा “मणिपद्म” (नैका बनिजारा, उपन्यास)

१९७५- गिरीन्द्र मोहन मिश्र (किछु देखल किछु सुनल, संस्मरण)

१९७६- वैद्यनाथ मल्लिक “विधु” (सीतायन, महाकाव्य)

१९७७- राजेश्वर झा (अवहट्ठ: उद्भव ओ विकास, समालोचना)

१९७८- उपेन्द्र ठाकुर “मोहन” (बाजि उठल मुरली, पद्य)

१९७९- तन्त्रनाथ झा (कृष्ण चरित, महाकाव्य)

१९८०- सुधांशु शेखर चौधरी (ई बतहा संसार, उपन्यास)

१९८१- मार्कण्डेय प्रवासी (अगस्त्यायिनी, महाकाव्य)

१९८२- लिली रे (मरीचिका, उपन्यास)

१९८३- चन्द्रनाथ मिश्र “अमर” (मैथिली पत्रकारिताक इतिहास)

१९८४- आरसी प्रसाद सिंह (सूर्यमुखी, पद्य)

१९८५- हरिमोहन झा (जीवन यात्रा, आत्मकथा)

१९८६- सुभद्र झा (नातिक पत्रक उत्तर, निबन्ध)

१९८७- उमानाथ झा (अतीत, कथा)

१९८८- मायानन्द मिश्र (मंत्रपुत्र, उपन्यास)

१९८९- काञ्चीनाथ झा “किरण” (पराशर, महाकाव्य)

१९९०- प्रभास कुमार चौधरी (प्रभासक कथा, कथा)

१९९१- रामदेव झा (पसिझैत पाथर, एकांकी)

१९९२- भीमनाथ झा (विविधा, निबन्ध)

१९९३- गोविन्द झा (सामाक पौती, कथा)

१९९४- गंगेश गुंजन (उचितवक्ता, कथा)

१९९५- जयमन्त मिश्र (कविता कुसुमांजलि, पद्य)

१९९६- राजमोहन झा (आइ काल्हि परसू, कथा संग्रह)

१९९७- कीर्ति नारायण मिश्र (ध्वस्त होइत शान्तिस्तूप, पद्य)

१९९८- जीवकान्त (तकै अछि चिड़ै, पद्य)

१९९९- साकेतानन्द (गणनायक, कथा)

२०००- रमानन्द रेणु (कतेक रास बात, पद्य)

२००१- बबुआजी झा “अज्ञात” (प्रतिज्ञा पाण्डव, महाकाव्य)

२००२- सोमदेव (सहस्रमुखी चौक पर, पद्य)

२००३- नीरजा रेणु (ऋतम्भरा, कथा)

२००४- चन्द्रभानु सिंह (शकुन्तला, महाकाव्य)

२००५- विवेकानन्द ठाकुर (चानन घन गछिया, पद्य)

२००६- विभूति आनन्द (काठ, कथा)

२००७- प्रदीप बिहारी (सरोकार, कथा)

२००८- मत्रेश्वर झा (कतेक डारि पर, आत्मकथा)

२००९- स्व.मनमोहन झा (गंगापुत्र, कथासंग्रह)

२०१०-श्रीमति उषाकिरण खान (भामती, उपन्यास)

२०११- श्री उदयचन्द्र झा "विनोद" (अपक्ष, कविता संग्रह)


साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार


१९९२- शैलेन्द्र मोहन झा (शरतचन्द्र व्यक्ति आ कलाकार-सुबोधचन्द्र सेन, अंग्रेजी)

१९९३- गोविन्द झा (नेपाली साहित्यक इतिहास- कुमार प्रधान, अंग्रेजी)

१९९४- रामदेव झा (सगाइ- राजिन्दर सिंह बेदी, उर्दू)

१९९५- सुरेन्द्र झा “सुमन” (रवीन्द्र नाटकावली- रवीन्द्रनाथ टैगोर, बांग्ला)

१९९६- फजलुर रहमान हासमी (अबुलकलाम आजाद- अब्दुलकवी देसनवी, उर्दू)

१९९७- नवीन चौधरी (माटि मंगल- शिवराम कारंत, कन्नड़)

१९९८- चन्द्रनाथ मिश्र “अमर” (परशुरामक बीछल बेरायल कथा- राजशेखर बसु, बांग्ला)

१९९९- मुरारी मधुसूदन ठाकुर (आरोग्य निकेतन- ताराशंकर बंदोपाध्याय, बांग्ला)

२०००- डॉ. अमरेश पाठक, (तमस- भीष्म साहनी, हिन्दी)

२००१- सुरेश्वर झा (अन्तरिक्षमे विस्फोट- जयन्त विष्णु नार्लीकर, मराठी)

२००२- डॉ. प्रबोध नारायण सिंह (पतझड़क स्वर- कुर्तुल ऐन हैदर, उर्दू)

२००३- उपेन्द दोषी (कथा कहिनी- मनोज दास, उड़िया)

२००४- डॉ. प्रफुल्ल कुमार सिंह “मौन” (प्रेमचन्द की कहानी-प्रेमचन्द, हिन्दी)

२००५- डॉ. योगानन्द झा (बिहारक लोककथा- पी.सी.राय चौधरी, अंग्रेजी)

२००६- राजनन्द झा (कालबेला- समरेश मजुमदार, बांग्ला)

२००७- अनन्त बिहारी लाल दास “इन्दु” (युद्ध आ योद्धा-अगम सिंह गिरि, नेपाली)

२००८- ताराकान्त झा (संरचनावाद उत्तर-संरचनावाद एवं प्राच्य काव्यशास्त्र-गोपीचन्द नारंग, उर्दू)

२००९- भालचन्द्र झा (बीछल बेरायल मराठी एकाँकी-  सम्पादक सुधा जोशी आ रत्नाकर मतकरी, मराठी)

२०१०- डॉ. नित्यानन्द लाल दास ( "इग्नाइटेड माइण्ड्स" - मैथिलीमे "प्रज्वलित प्रज्ञा"- डॉ.ए.पी.जे. कलाम, अंग्रेजी)
२०११- श्री खुशीलाल झा (उपरवास कथात्रयी, रघुवीर चौधरीक गुजराती उपन्यास)

साहित्य अकादेमी मैथिली बाल साहित्य पुरस्कार


२०१०-तारानन्द वियोगीकेँ पोथी "ई भेटल तँ की भेटल"  लेल
२०११- ले.क. मायानाथ झा "जकर नारी चतुर होइ" लेल
२०१२- मुरलीधर झा (पिलपिलहा गाछ, अ-बाल साहित्य, पैघ लोक लेल कथाक संग्रह लेल)

साहित्य अकादेमी युवा पुरस्कार

२०११- श्री आनन्द कुमार झा (हठात परिवर्तन, नाटक)

प्रबोध सम्मान


प्रबोध सम्मान 2004- श्रीमति लिली रे (1933- )

प्रबोध सम्मान 2005- श्री महेन्द्र मलंगिया (1946- )

प्रबोध सम्मान 2006- श्री गोविन्द झा (1923- )

प्रबोध सम्मान 2007- श्री मायानन्द मिश्र (1934- )

प्रबोध सम्मान 2008- श्री मोहन भारद्वाज (1943- )

प्रबोध सम्मान 2009- श्री राजमोहन झा (1934- )

प्रबोध सम्मान 2010- श्री जीवकान्त (1936- )

प्रबोध सम्मान 2011- श्री सोमदेव (1934- )

प्रबोध सम्मान 2012- श्री चन्द्रभानु सिंह (१९२२- )

                                  श्री रामलोचन ठाकुर (१९४९- )

यात्री-चेतना पुरस्कार



२००० ई.- पं.सुरेन्द्र झा “सुमन”, दरभंगा;

२००१ ई. - श्री सोमदेव, दरभंगा;

२००२ ई.- श्री महेन्द्र मलंगिया, मलंगिया;

२००३ ई.- श्री हंसराज, दरभंगा;

२००४ ई.- डॉ. श्रीमती शेफालिका वर्मा, पटना;

२००५ ई.-श्री उदय चन्द्र झा “विनोद”, रहिका, मधुबनी;

२००६ ई.-श्री गोपालजी झा गोपेश, मेंहथ, मधुबनी;

२००७ ई.-श्री आनन्द मोहन झा, भारद्वाज, नवानी, मधुबनी;

२००८ ई.-श्री मंत्रेश्वर झा, लालगंज,मधुबनी

२००९ ई.-श्री प्रेमशंकर सिंह, जोगियारा, दरभंगा

२०१० ई.- डॉ. तारानन्द वियोगी, महिषी, सहरसा

२०११ ई.-  डॉ. राम भरोस कापड़ि भ्रमर (जनकपुर)


भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता

युवा पुरस्कार (२००९-१०) गौरीनाथ (अनलकांत) केँ मैथिली लेल।


भारतीय भाषा संस्थान (सी.आइ.आइ.एल.) , मैसूर रामलोचन ठाकुर:- अनुवाद लेल भाषा-भारती सम्मान २००३-०४ (सी.आइ.आइ.एल., मैसूर) जा सकै छी, किन्तु किए जाउ- शक्ति चट्टोपाध्यायक बांग्ला कविता-संग्रहक मैथिली अनुवाद लेल प्राप्त।  रमानन्द झा 'रमण':- अनुवाद लेल भाषा-भारती सम्मान २००४-०५ (सी.आइ.आइ.एल., मैसूर) छओ बिगहा आठ कट्ठा- फकीर मोहन सेनापतिक ओड़िया उपन्यासक मैथिली अनुवाद लेल प्राप्त।



साहित्य, नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान २०१२ क घोषणा



विदेह सम्मान

विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान

१.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार २०१०-११ 
२०१० श्री गोविन्द झा (समग्र योगदान लेल)
२०११ श्री रमानन्द रेणु (समग्र योगदान लेल)

२.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०११-१२ 

२०११ मूल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (गामक जिनगी, कथा संग्रह)
२०११ बाल साहित्य पुरस्कार- ले.क. मायानाथ झा (जकर नारी चतुर होइ, कथा संग्रह)
२०११ युवा पुरस्कार- आनन्द कुमार झा (कलह, नाटक)
२०१२ अनुवाद पुरस्कार- श्री रामलोचन ठाकुर- (पद्मानदीक माझी, बांग्ला- मानिक बंद्योपाध्याय, उपन्यास बांग्लासँ मैथिली अनुवाद)


विदेह भाषा सम्मान २०१२-१३ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध)

1.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार 2012
2012 श्री राजनन्दन लाल दास (समग्र योगदान लेल)
2.विदेह भाषा सम्मान २०१२-१३ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध)
२०१२ बाल साहित्य पुरस्कार - श्री जगदीश प्रसाद मण्डल केँ “तरेगन” बाल प्रेरक विहनि कथा संग्रह
२०१२ मूल पुरस्कार - श्री राजदेव मण्डलकेँ "अम्बरा" (कविता संग्रह) लेल।
2012 युवा पुरस्कार- श्रीमती ज्योति सुनीत चौधरीक “अर्चिस” (कविता संग्रह)
2013 अनुवाद पुरस्कार- श्री नरेश कुमार विकल "ययाति" (मराठी उपन्यास श्री विष्णु सखाराम खाण्डेकर)

नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान २०१२ क घोषणा

अभि‍नय- मुख्य अभिनय ,

सुश्री शि‍ल्‍पी कुमारी, उम्र- 17 पि‍ता श्री लक्ष्‍मण झा

श्री शोभा कान्‍त महतो, उम्र- 15 पि‍ता- श्री रामअवतार महतो,

हास्‍य-अभिनय

सुश्री प्रि‍यंका कुमारी, उम्र- 16, पि‍ता- श्री वैद्यनाथ साह

श्री दुर्गानंद ठाकुर, उम्र- 23, पि‍ता- स्‍व. भरत ठाकुर

नृत्‍य

सुश्री सुलेखा कुमारी, उम्र- 16, पि‍ता- श्री हरेराम यादव

श्री अमीत रंजन, उम्र- 18, पि‍ता- नागेश्वर कामत

चि‍त्रकला
श्री पनकलाल मण्डल, उमेर- ३५, पिता- स्व. सुन्दर मण्डल, गाम छजना
श्री रमेश कुमार भारती, उम्र- 23, पि‍ता- श्री मोती मण्‍डल

संगीत (हारमोनियम)

श्री परमानन्‍द ठाकुर, उम्र- 30, पि‍ता- श्री नथुनी ठाकुर

संगीत (ढोलक)

श्री बुलन राउत, उम्र- 45, पि‍ता- स्‍व. चि‍ल्‍टू राउत

संगीत (रसनचौकी)

   श्री बहादुर राम, उम्र- 55, पि‍ता- स्‍व. सरजुग राम

शिल्पी-वस्तुकला

    श्री जगदीश मल्लिक,५० गाम- चनौरागंज

मूर्ति-मृत्तिका कला

श्री यदुनंदन पंडि‍त, उम्र- 45, पि‍ता- अशर्फी पंडि‍त


काष्ठ-कला

श्री झमेली मुखिया,पिता स्व. मूंगालाल मुखिया, ५५, गाम- छजना


किसानी-आत्मनिर्भर संस्कृति

श्री लछमी दास, उमेर- ५०, पिता स्व. श्री फणी दास, गाम वेरमा

विदेह मैथिली पत्रकारिता सम्मान

-२०१२ श्री नवेन्दु कुमार झा

गजल कमला-कोसी-बगमती-महानंदा सम्मान

अनचिन्हार आखर ( http://anchinharakharkolkata.blogspot.com ) द्वारा प्रायोजित "गजल कमला-कोसी-बगमती-महानंदा सम्मान" बर्ख 2011 लेल ओस्ताद सदरे आलम गौहर जीकेँ प्रदान कएल गेलैन्ह। एहि बेरुक मुख्यचयनकर्ता ओस्ताद सियाराम झा"सरस" छलखिन्ह।..

Saturday, November 24, 2012

जनकपुरमे रेकर्डिङ्ग स्टूडियोक स्थापना (रिपोर्ट सुजीत कुमार झा)



जनकपुरधाम, अगहन ६ ।
जनकपुरमे गीत रेकर्डिङ्गकेँ स्टूडियो स्थापना भेल अछि ।
क्याम्पस चौक स्थित कामेश्वर मल्लिकक घरमे निशान्त अडियो भिडियो एण्ड सपोर्ट सिस्टम नवरस नामक ओ रेकर्डिङ्ग स्टूडियोकेँ मंगलदिन एक समारोहबीच वन तथा भू–संरक्षण मन्त्री यदुवंश झा उद्घाटन कएलन्हि ।
ओ स्टूडियोमे हरेक प्रकारक गीत रेकर्डिङ्ग करवाक प्रविधि रहल समारोहमे
नवरसक संचालक सुनिल मल्लिक जानकारी देलन्हि ।
समारोहमे मन्त्री झा मैथिली भाषा, साहित्य कला संस्कृतिक विकासक लेल निजी स्तर सँ जे प्रयास भऽ रहल अछि ओ प्रशंसनीय रहल उल्लेख कएलन्हि ।
एहि स्टूडियोक माध्यम सँ मैथिली कलाक विकास हएत हुनक कथन छल ।

ओ अवसरपर नेहा प्रिदर्शनीद्वारा गाओल गेल गीतक गीति एल्वम ‘नेहा’केँ लोकार्पण कएल गेल । ओ गीति एल्वमकेँ वन तथा भू–संरक्षण मन्त्री यदुवंश झा आ मैथिलीक वरिष्ठ साहित्यकार डा. राजेन्द्र विमल संयुक्त रुप सँ लोकार्पण कएलन्हि ।
स्टूडियोक निर्देशक कामेश्वर मल्लिकक अध्यक्षतामे सम्पन्न ओ उद्घाटन तथा विमोचन समारोहमे डा. राजेन्द्र विमल, डा. रेवती रमण लाल, विद्यापति कोषक संयोजक अयोध्या नाथ चौधरी, नेकपा माओवादीक नेता रोशन जनकपुरी, मिथिला नाट्य कला परिषदक पूर्व अध्यक्ष सुनिल मिश्र, मैथिली विभागक प्रमुख परमेश्वर कापड़ि, कान्तिपुरक श्याम सुन्दर शशि, रेडियो मिथिला आ मिथिला डटकमक सम्पादक सुजीत कुमार झा, अनिल चन्द्र झा, नेहा प्रियदर्शनी सहितक वक्तासभ बाजल छलथि ।

Tuesday, November 20, 2012

दिल्ली इब्सन फेस्टिवल ०१ दिसम्बर २०१२ सँ ०७ दिसम्बर २०१२ धरि

-दिल्ली इब्सन फेस्टिवल ०१ दिसम्बर २०१२ सँ ०७ दिसम्बर २०१२ धरि (वेबसाइट http://www.delhibsenfestival.com/ )
-ड्रामाटिक आर्ट आ डिजाइन अकादेमी आ रोयल नॉर्वे एम्बेसीक तत्वावधानमे इब्सनक नाटकक प्रदर्शन हएत।


Tuesday, November 13, 2012

गंगा ब्रिज (नाटक)- गजेन्द्र ठाकुर विदेह नाट्य उत्सव २०१३ मे मंचित हएत



गंगा ब्रिज (नाटक)- गजेन्द्र ठाकुर
विदेह नाट्य उत्सव २०१२ मे भरत नाट्यशास्त्रक संकल्पनाक संग गजेन्द्र ठाकुरक उल्कामुखक अपार सफलताक बाद...
विदेह नाट्य उत्सव २०१३ मे ...
"समकालीन रंगमंचीय वास्तुकला"क आधारपर...

गजेन्द्र ठाकुरक "गंगा ब्रिज"
रिटायरमेंट आ मृत्युक बीच संघर्षमे के जीतत...
तँ की हारि जाइ
तँ की छोड़ि दिऐ
इच्छा जीतत आकि जीतत ईर्ष्या
संकल्प हमर जे एहि धारकेँ मोड़ि देब
मुदा किछु ईर्ष्या अछि सोझाँ अबैत
ईर्ष्या जे हम धारकेँ नहि मोड़ि पाबी
बहैत रहए ओ ओहिना
ओहिना किए ओहूसँ भयंकर बनि

संकल्प जे हम केने छी
इच्छा जे अछि हमर/ से हारि जाए
आ जीति जाए द्वेष/ जीति जाए ईर्ष्या
हा हारबो करी तेना भऽ कऽ जे लोक देखए!/ जमाना देखए!!
तेना कऽ हारए संकल्प हमर/ इच्छा हमर
धारकेँ रोकि देबाक/ ठाढ़ भऽ जएबाक सोझाँ ओकर
आ मोड़ि देबाक संकल्प ओहि भयंकर उदण्ड धारकेँ
मुदा किछु आर ईर्ष्या अछि सोझाँ अबैत
ओ द्वेष चाहैए जे हमर प्रयास/ धारकेँ मोड़बाक प्रयास
मोड़लाक प्रयासक बाद भऽ जाए धार आर भयंकर
पुरान लीखपर चलैत रहए भऽ आर अत्याचारी
आ हम जाए हारि
आ हारी तेना भऽ कऽ जे लोक राखए मोन
मोन राखए जे कियो दुस्साहसी ठाढ़ भऽ गेल छल धारक सोझाँ
तकर भेल ई भयंकर परिणाम
जे लोक डरा कऽ नहि करए फेर दुस्साहस
दुस्साहस ठाढ़ हेबाक उदण्ड-अत्याचारी धारक सोझाँमे
लऽ ली हम पतनुकान/ आ से सुनि थरथरी पैसि जाए लोकक हृदयमे

मुदा हम हँसै छी
हारि तँ जाएब हम मुदा हमर साधनासँ जे रक्तबीज खसत
से एक-एकटा ठोपक बीआ बनि जाएत सहस्रबाढ़नि झोँटाबला
घृणाक विरुद्ध ठाढ़ अछि हमर ई बुढ़िया डाही।



मैथिली नाटककेँ.....................
नव आयाम दैत ............................
नाटकक नव युगमे प्रवेश प्रवेश करबैत अछि.......
 "गंगा ब्रिज".......................................................
विदेह नाट्य उत्सव २०१३ मे मंचित हएत............................
निर्देशक बेचन ठाकुर..................................................................
मंच "समकालीन रंगमंचीय वास्तुकला"क आधारपर.........................................................................

“विदेह मैथिली नाट्य महोत्सव २०१३”-निर्देशक बेचन ठाकुर [किछु तँ छै जे हमर अस्तित्व नै मेटाइए, कतेक सए सालसँ अछि दुश्मन ई दुनियाँ तैयो।] कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन, दौरे-ज़माँ हमारा [इकबाल]
चित्र साभार विकीपीडिया


गंगा ब्रिज (नाटक)- गजेन्द्र ठाकुर
कल्लोल एक
दृश्य १
स्टेजक एक कात किछु मजदूर सभ खट-खुट कऽ गिट्टी पजेबा तोड़ि रहल छथि लगैए जे गंगापुलक मरोम्मति भऽ रहल अछि, कारण किछु मजदूर जय माँ गंगे कहि मंचक नीचाँ प्रणाम सेहो कऽ रहल छथि। स्टेजक दोसर कात दूटा लोक नीचाँ राखल नगाड़ा-ढोलपर चोट दऽ रहल अछि। तखने एकटा ढोलहो देनहारक प्रवेश।

ढोलहो देनहार : गंगा ब्रिज। पवित्र गंगापर बनल ऐ पुलक मरोम्मति लेल मजदूर चाही। स्त्री-पुरुष, बाल-वृद्ध सभ कियो आवेदन दऽ सकै छथि। (ढोलहो दैत) सुनै जाउ, सुनै जाउ।गंगा ब्रिज। पवित्र गंगापर बनल ऐ पुलक मरोम्मति लेल मजदूर चाही। स्त्री-पुरुष, बाल-वृद्ध सभ कियो आवेदन दऽ सकै छथि।
एकटा लोक (डंका बजेनाइ छोड़ि मजदूर सभकेँ अकानैत ढोलहो देनहार लग अबैए , मुदा दोसर लोक आस्ते आस्ते डंका बजबिते रहैत अछि): देखै छिऐ जे काज तँ चलिये रहल छै, तखन फेर?
ढोलहो देनहार: एतबे मजदूरसँ काज नै चलतै। पूरा पुल हिल रहल छै। (ढोलहो दैत) सुनै जाउ, सुनै जाउ।गंगा ब्रिज। पवित्र गंगापर बनल ऐ पुलक मरोम्मति लेल मजदूर चाही। स्त्री-पुरुष, बाल-वृद्ध सभ कियो आवेदन दऽ सकै छथि।
दोसर लोक (डंका बजेनाइ छोड़ि कऽ ढोलहो देनहार लग अबैए): एतबे दिनमे कोना ई हाल भऽ गेलै। सुनै छिऐ जतेक पाया ऐ पुलमे छै ततेक कए करोड़ टाका एकरा बनबैमे खर्च भेल रहै।
ढोलहो देनहार:काज ढंगसँ नै भेल रहै। सुनै जाउ, सुनै जाउ...। गंगापर बनल ऐ पुलक मरोम्मति लेल मजदूर चाही। स्त्री-पुरुष, बाल-वृद्ध सभ कियो आवेदन दऽ सकै छथि। सुनै जाउ, सुनै जाउ।
एकटा लोक: देखै छिऐ, जहिया बनिये रहल छलै, बनि कऽ तैयारो नै भेल रहै, तहियेसँ ऐ पुलक मरोम्मति शुरू छै।
दोसर लोक: चिप्पीपर चिप्पी पड़ि रहल छै। उद्घाटनसँ पहिनहिये सँ चिप्पी पड़नाइ शुरू भऽ गेल रहै।
ढोलहो देनहार: सरकारी पुल छिऐ, चिप्पी नै पड़तै तँ इन्जीनियर आ ठिकेदारक घरपर छज्जा कोना एतै। सुनै जाउ, सुनै जाउ...।
एकटा लोक: हौ ढोलहोबला, से तँ बुझलिऐ, मुदा से ने कहऽ जे दुनियाँ मे आनो ठाम पुल बनै छै, से ओतुक्का इन्जीनियर आ ठिकेदारक घरपर छज्जा पड़ै छै आकि नै हौ।
ढोलहो देनहार: किजा ने गेलिऐ, मुदा सुनै छिऐ अंग्रेजबला पुल मजगूत होइ छलै। सुनै जाउ, सुनै जाउ...।
दोसर लोक: हौ, अनेरक पाइ आबै छलै लूटिक तँ जे एकाध टा पुल अंग्रेज बनेलकै से मजगूते ने हेतै हौ।
एकटा लोक:ई इन्जीनियर आ ठिकेदार सभ लूटिमे अंग्रेजसँ कम नै छै, मुदा पुल मजगूत किए नै बनबै छै हौ। ओइ बनबैमे अंग्रेज सन किए नै छै हौ।
दोसर लोक: मजगूत बना देतै तँ फेर मरोम्मतिक ठेका कोना भेटतै हौ। की हौ ढोलहोबला..
ढोलहो देनहार: किजा ने गेलिऐ। सुनै जाउ, सुनै जाउ...। गंगापर बनल ऐ पुलक मरोम्मति लेल मजदूर चाही। स्त्री-पुरुष, बाल-वृद्ध सभ कियो आवेदन दऽ सकै छथि। सुनै जाउ, सुनै जाउ।


(ढोलहो बला चलि जाइए। पाछाँसँ दू-दूटा तिरंगा झण्डा लेने बच्चा सभ अबैए। संगमे दूटा शिक्षक छै। एकटा शिक्षक (वा शिक्षिका) आगाँ-आगाँ आ एकटा शिक्षक (वा शिक्षिका) पाछाँ-पाछाँ चलि रहल छथि। सभ मजदूरकेँ एक-एकटा झण्डा दऽ देल जाइ छै। ओइ दुनू टा लोककेँ सेहो एक-एकटा झण्डा देल जाए”- ई गप शिक्षक इशारामे कहै छथि, मुदा झण्डा घटि गेलै, से ओ दुनू खाली हाथ रहि जाइ छथि आ सभक मुँह ताकऽ लगै छथि।
मजदूरक सोझाँ ओ दुनू लोक ठाढ़ भऽ जाइए आ फेर डंके लग आबि ठाढ़ भऽ जाइए आ आश्चर्यसँ देखऽ लगैए।
त्रिवार्णिक झण्डा लऽ कऽ बाकी सभ गोटे मंचपर छितरा जाइ छथि आ स्टेजपर ठाढ़ भऽ जाइ छथि। उल्लासक वातावरण सगरे पसरल अछि, दुनू लोककेँ छोड़ि सभक मुँहपर (मजदूर सभक सेहो) हँसी-प्रसन्नता आबि जाइ छै
जखन सभ ठाढ़ भऽ जाइ छथि तखन दुनू शिक्षक (वा शिक्षिका) बच्चा सभक आगाँ आ दर्शक सभक सोझाँ ठाढ़ भऽ जाइ छथि।
१५ अगस्त ई नारा दुनू शिक्षक बाजै छथि आ “स्वतंत्रता दिवस सभ मिलि कऽ (दुनू लोक केँ छोड़ि कऽ) बाजै छथि।

शिक्षक (वा शिक्षिका) १: बौआ-बुच्ची। आइ ई त्रिवार्णिक झण्डा हमरा सभक हाथमे फहरा रहल अछि। पहिने हम सभ दोसराक अधीन छलौं, पराधीन छलौं, ई झण्डा झुकल छल, फहरा नै सकै छलौं। झण्डा फहराइत रहए ओइ लेल हमरा सभकेँ जोर लगाबैत रहऽ पड़त। (चारू दिस हाथ पसारैत) ऐ इलाकामे आब खुशी पसरत। जमीन्दारक राज खतम भऽ गेल। सभ कियो पढ़ि सकै छथि। झगड़ा-झाँटी, युद्ध, आब सभ खतम भऽ गेल। हमरा सभक जीवनमे एकटा नवका भोर आएल अछि। नवका शिक्षा, नवका खेतीक चलनि हएत।  
शिक्षक (वा शिक्षिका) २: बड़का चिमनीक धुँआ आ बड़का-बड़का बान्ह। बिलैंतसँ आबैबला सभ समान चिमनीबला फैक्ट्रीमे तैयार हएत। बड़का-बड़का बान्ह ओइ धारकेँ बान्हि-छेक कऽ सञ्जत कऽ देत। खूब उपजत खेत, बर्खा बरखत इन्द्रक नै हमरा सभक प्रतापसँ। खेते-खेत बहत धार, हएत पटौनी। छोट-पैघक भेद मेटा जाएत।
शिक्षक (वा शिक्षिका) १: छोट-पैघक भेद मेटा जाएत? बड़का चिमनीक धुँआ आ बड़का-बड़का बान्ह छोट-पैघक भेद मेटाएत?
शिक्षक (वा शिक्षिका) २: हँ। पटौनी हएत खेते-खेत। बिलैंतसँ आबैबला सभ समान आब एतै चिमनीबला फैक्ट्रीमे तैयार हएत।
शिक्षक (वा शिक्षिका) १: बड़का बान्ह आ बड़का फैक्ट्रीसँ ढेर रास समस्या सेहो आबै छै। ओकर निदान जरूरी छै। विकास एकभग्गो भऽ जाएत।
शिक्षक (वा शिक्षिका) २: विकास एकभग्गू कोना हएत?
शिक्षक (वा शिक्षिका) १: बड़का फैक्ट्री सभ ठाम नै लागि सकत, कतौ-कतौ लागत, ओतऽ बोनिहारक पड़ैन हएत। बड़का बान्ह बनलासँ ओकर भीतरक गामसँ सेहो लोकक पड़ैन हएत। बड़का बान्ह जँ मजगूत नै हएत तँ ओ टूटत आ प्रलय आएत। बड़का फैक्ट्री आ बड़का बान्ह लोकक जिनगीकेँ छहोछित कऽ देत।
शिक्षक (वा शिक्षिका) २:एक पीढ़ीकेँ तँ बलिदान देबैए पड़त। बच्चा सभ, बाजै जाउ। अहाँ सभ देश लेल अपनाकेँ समर्पण करब आकि नै।
शिक्षक (वा शिक्षिका) १: बच्चा सभ, बाजै जाउ, अहाँ सभ की बनऽ चाहै छी। समाजकेँ की देबऽ चाहै छी।
बच्चा: हम इन्जीनियर बनब आ सड़क, पुल, नहर बनाएब। जइसँ लोकक दुःख दूर हेतै।
बच्चा २: हमहूँ इन्जीनियर बनब। बड़का-बड़का बान्ह, बड़का-बड़का चिमनीक धुँआ। धुँआ सुंघैमे हमरा बड्ड नीक लागैए। कतेक नीक दिन आएत, बड़का-बड़का बान्ह, बड़का-बड़का चिमनी देश भरिमे पसरि जाएत।
बच्चा: मुदा धुँआसँ खोँखी होइ छै। हमर माए खोँखी करैत रहैए। हमरा धुँआसँ परहेज अछि।
बच्चा २:मुदा हमर माए तँ भनसाघर जाइतो नै अछि। मुदा हम जाइ छी, चोरा-नुका कऽ, आ धुँआक गंध, बड़का देवार, ई सभ हमरा बड्ड नीक लगैए।
शिक्षिका : नीकगप। मुदा विकास केहन हुअए, ई सभ हमरा सभक हाथमे नै अछि। पटना आ दिल्लीमे ई निर्णय हएत जे हमरा सभ लेल केहन विकास हेबाक चाही।
शिक्षिका: नीकगप, नीक गप जे हमरा सभक विकास लेल पटना आ दिल्लीमे सोचल जा रहल अछि मुदा ओतऽ बैसि कऽ वा एकाध दिनक हलतलबीमे कएल दौड़ासँ ओ सभ उचित निर्णय लऽ सकता? जे से, मुदा हम सभ समाज लेल काज करी, से सतत ध्यान रहए। पूरा इमानदारीसँ, जान जी लगा कऽ ऐ देशक इतिहास हमरा सभकेँ बनेबाक अछि, से ध्यान रहए। आइ १५ अगस्त १९४७ केँ हम ई प्रण ली, वचन दी।
सभ बच्चा: हम सभ वचन दै छी, हम सभ पूरा इमानदारीसँ जान जी लगा कऽ ऐ देशक नव इतिहास लिखब।
(“१५ अगस्त ई नारा दुनू शिक्षक बाजै छथि आ “स्वतंत्रता दिवस सभ मिलि कऽ (दुनू लोक केँ छोड़ि कऽ) बाजै छथि। बच्चा आ शिक्षक सभ मजदूर सभसँ झण्डा आपस लऽ लै छथि। मजदूर सभ फेर बैसि कऽ ठक-ठुक करऽ लगैए। दुनू लोक ओतै हतप्रभ ठाढ़ रहैए। फेर पर्दाक पाछाँ कोनमे देखऽ लगैए जेना ककरो एबाक प्रतीक्षा कऽ रहल हुअए। तखने दुनू हरबड़ा कऽ जाइए आ एकटा कुर्सी आनि कऽ राखैए। कटा ४०-४५ बर्खक अभियन्ता मंचपर अबैए। अभियन्ता कनेक हाँफि रहल अछि, कुर्सी देखिते ओ धबसँ ओइ कुर्सीपर बैसि जाइए। फेर साँस स्थिर कऽ ठाढ़ होइए। ठक-ठुक बन्द भऽ जाइ छै आ मजदूर सभ फ्रीज भऽ जाइए, ओ दुनू लोक कोन दिस दंका लग चलि जाइए आ फ्रीज भऽ जाइए। अभियन्ता बाजऽ लगैए।

अभियन्ता: (कुर्सीकेँ झमाड़ैत) एना। एना हिलि रहल अछि ई, ई गंगा ब्रिज। सीमेन्ट, बालु, गिट्टीक कंक्रीटसँ बनल ई पुल कठपुलासँ बेशी हिलैए। जहिया आबै छी, मरोम्मतियेक काज चलैत रहै छै। वन-वे, एक दिस; एक्के दिसुका मात्र भऽ कऽ रहि गेल अछि ई। एक्के दिस पुल खुजल छै, दोसर दिस कोना चलत, अदहा पुलपर मरोम्मतिक काज भऽ रहल अछि। (तखने ओ आभासी रूपमे हिलऽ लगैए आ ओकर बाजब थरथरा उठै छै।) ई पुल तँ एत्ते हिलि रहल अछि जत्ते गामक कठपुलो नै हिलैए।
(तखने एकटा ठिकेदार अबैए।)
ठिकेदार (अभियन्तासँ): हइ इन्जीनियर। तोहूँ वएह कऽ वएह रहि गेलेँ। बालुकेँ एना कऽ चालनिसँ चालू, ओना कऽ चालू, जेना ओ चाउर दालि हुअए मुदा हम सेहो चाललौं। ठीक छै ठीक छै। तूँ कहै छलेँ जे रोटी बनेबा लेल जेना चालै छी तहिना पुल बनेबा लेल चालू, तखने नीक रोटी सन नीक पुल बनत। ठीक छै ठीक छै। फेर एतेक सीमेन्ट, एतेक बालु, एतेक.. हम कहने रही जे हम तोहर सभ गप मानब, मुदा तखन नेता, दोसर इन्जीनियर, गुण्डा, एकरा सभकेँ कमीशन कतऽ सँ देबै? तोरा कहलासँ बालु चालऽ लगलौं कमीशन बन्द कऽ देलिऐ। हमर तँ किछु नै भेल मुदा तोहर बदली भऽ गेलौ, तोहर दरमाहा बन्न भऽ गेलौ। बच्चा सभक नाम स्कूलसँ कटाबऽ पड़लौ, गाम पठाबऽ पड़लौ बच्चा सभकेँ। हम कहने रहियौ तोरा, जे बालु चालब, एतेक सीमेन्ट, एतेक बालु, सभ निअमसँ देबै। हमरा की? इलाकाक पुल, सड़क जतेक मजगूत रहतै ततेक ने नीक। हमरो लेल नीके। मुदा हमरा बूझल छल जे तोहर बदली भऽ जेतौ। चीफ इन्जीनियर, नेताक दहिना हाथ.. पहिने हमरे कहने रहए तोरा रोलरक नीचाँमे पिचड़ा कऽ दैले.. बइमान चीफ इन्जीनियर। देख, पहिने हमरो होइ छल जे तोहूँ ओकरे सभ जेकाँ छेँ, अपन रेट बढ़ाबैले ई सभ कऽ रहल छेँ। मुदा बादमे हम देखलौं जे नै, तूँ अलग छेँ। मुदा हम की करू? हम अपन बच्चाक नाम स्कूलसँ नै कटबा सकै छी। मुदा जौँ तोरा सन चीफ इन्जीनियर आबि जाए.... कहियो से दिन आबए... तखन हम फेरसँ बालु चालब शुरू करब आ वएह चालल बालु, एत्ते बालु एत्ते सीमेन्टमे मिलाएब। एत्ते बालु, एत्ते सीमेन्ट, सभटा ओहिना जेना अहाँ तूँ कहै छलेँ। मुदा जखन तोरा सन कियो आबए तखने किने। ताधरि तँ...
(अभियन्ता आ ठिकेदारक प्रस्थान। लागल जेना फ्रीज लोककेँ अभियन्ता आ ठिकेदारक गपक विषयमे बुझल नै भेलै जेना ई सभ आभाषी छल। दुनूटा लोक फ्रीज स्थितिसँ घुरि असथिरसँ डंका बजबऽ लगैए आ तखन मजदूर सभ सेहो फ्रीज स्थितिसँ आपस आबि जाइए आ फेरसँ ठकठुक करऽ लगैए। दुनू लोक डंकाक अबाज आस्ते-आस्ते तेज करऽ लगैए आ फेर ठक-ठुकक अबाज मद्धिम पड़ि जाइए आ डंकाक अबाजक संग पर्दा खसैए।)


 जारी....
(चित्र साभार विकीपीडिया)



Saturday, November 10, 2012

रमेश रञ्जन झाद्वारा लिखित मैथिली भाषाक नाटक "मुर्दा" नाटकक विमोचन सम्पन्न (रिपोर्ट सुजीत कुमार झा )


मैथिलीक चर्चित युवा साहित्यकार रमेश रञ्जन झाक नयाँ कृति ‘मुर्दा’नाटककेँ सोमदिन विमोचन  ।
मैथिली विकास कोषद्वारा प्रकाशित ओ पुस्तककेँ होटल सीता प्यालेसमे सोमदिन भोरमे नेपालक चर्चित लेखक डा. अभि सुवेदी द्वारा विमोचन, कोषक अध्यक्ष जीवनाथ चौधरी जानकारी देलन्हि अछि ।
रमेश रञ्जनक एहि सँ पूर्व संगोर उपन्यासक अतिरिक्त रत्तवर्षा कविता संग्रह प्रकाशित अछि ।
नेपाल संगीत तथा नाट्य प्रतिष्ठानक प्राज्ञ रहल रमेश रञ्जन साहित्यक अधिकांश क्षेत्रमे कलम चलबैत छथि ।
बैरियर के तोड़त ?


प्राज्ञ रमेश रञ्जन झाद्वारा लिखित मैथिली भाषाक नाटक मुर्दाक विमोचन समारोहमे प्रमुख अतिथिक आसन सँ बजैत नेपाली भाषाक चर्चित लेखक डा. अभि सुवेदी मैथिलीक लेल बहुत रास बैरियर लागल अछि, ओकरा तोड़ने विना एकर सहज विकास होबए नहि सकत उल्लेख कएलन्हि अछि ।
डा. सुवेदी त्रिभुवन विश्व विद्यालयमे अंग्रेजी विषयक शिक्षक छथि । देश विदेशक प्रमुख पत्रिकासभमे हुनकर लेख प्रकाशित होइत रहैत अछि । अर्थात ओ बहुत अनुभवी लोक छथि । हुनकर अनुमान गलत नहि भऽ सकैत अछि ।
कारण नेपालमे सभ सँ बेसी बाजए बला दोसर भाषा मैथिली अछि । नेपाल भारतक मैथिली भाषीक संख्या ५ करोड़ सँ बेसी अछि । एकर बादो मैथिलीक विकास नहि भऽ रहल अछि । एखनो मैथिली भाषी अपन स्वर्णीम इतिहासेकेँ गुणगान करैत अछि ।
नेपालमे संविधानक संग संघीयताक बात उठैत अछि तऽ सभ सँ बेसी विरोध मिथिलेकेँ नामपर होइत अछि । फेर एकर विरोध कोनो अन्य लोक नहि अपनाकेँ मधेशी कहएबला मैथिलीसभ करैत छथि ।
अर्थात सभ सँ बडका बैरियर मैथिलीसभ स्वयं छथि जेना लगैत अछि ।
हुनकासभकेँ बुझौने आगा नहि बढल जा सकैत अछि । तहिना राजनीतिक दलकेँ कोना मिथिला मैथिलीक प्रमुख मुद्दा बनैक ताहिकेँ लेल काज करय पड़त ।
तहिना मैथिली भाषा, साहित्य, कला, संस्कृतिक विकासक लेल निजि स्तर सँ सेहो प्रयास होएब आवश्यक अछि ।
किछु वर्ष इम्हर काज तऽ भेल अछि । जेना पुस्तक प्रकाशन बढव, लेखकद्वारा मात्र नहि कोनो संस्थाद्वारा सेहो पुस्तक प्रकाशन होएब, मैथिली भाषामे निमन्त्रण कार्ड मात्र नहि पत्रपत्रिका सेहो प्रकाशित होएब, देशक दर्जनो रेडियो एफएममे मैथिली भाषाक कार्यक्रम आ समाचार प्रशारण भऽ रहल अछि ।
बैरियर जे अछि ओ टुटत तऽ मैथिलीक विकासकेँ किओ नहि रोकि सकैत अछि । ई बैरियर तोड़ए लेल सम्पूर्ण मैथिलकेँ एक बेर संकल्प लेबहे पड़त ।

जनकपुरधाम, कातिक २० ।
रमेश रञ्जन झाद्वारा लिखित मैथिली भाषाक नाटक ‘मुर्दा’क सोमदिन एक समारोह बीच विमोचन कार्यक्रम सम्पन्न भेल अछि ।
नेपाली भाषाक चर्चित लेखक डा. अभि सुवेदी जनकपुरक रामानन्द चौक स्थित सीता प्यालेस होटलमे विमोचन कएलन्हि अछि ।
ओ नाटकक प्रकाशक मैथिली विकास कोष रहल अछि ।
नेपाल संगीत तथा नाट्य प्रतिष्ठानक प्राज्ञ सेहो रहल रमेश रञ्जनक ई तेसर कृति रहल अछि । एहि सँ पूर्व ‘संगोर’ उपन्यास आ रक्तवर्षा कविता संग्रह प्रकाशित अछि ।
रामानन्द युवा क्लवद्वारा प्रकाशित कथा यात्राक सम्पादन सेहो रमेश कएने छथि ।
मैथिली विकास कोषक अध्यक्ष जीवनाथ चौधरीक अध्यक्षतामे भेल विमोचन समारोहमे वक्तासभ मैथिली साहित्यक विकासक लेल प्रकाशन कार्यपर जोड़ देबए सुझाव देलन्हि । नेपालक धर्तीपर मैथिली नाटकक स्वर्णीम इतिहास भेलाक बादो दू दर्जन सँ बेसी मैथिली नाटक प्रकाशन नहि होएब दुःखक बात रहल हुनक सभक कथन छल ।
कार्यक्रममे नेपाली भाषाक चर्चित लेखक डा. अभि सुवेदी मैथिलीक लेल बहुतरास बैरीयरसभ लागल अछि ओकरा तोडने विना एकर सहज विकास होबए नहि सकत उल्लेख कएलन्हि ।
मैथिली भाषाक लेखकसभ बहुत प्रतिभावानसभ होइतो अवसरकेँ अभावमे बहुत काज होबए नहि सकल हुनक कथन छल ।
नेपाली आ मैथिली भाषाक सम्बन्धक विषयमे चर्चा करैत ओ कहलन्हि दुनू भाषाक साहित्यकारसभकेँ मिलि कऽ आगा बढए पड़त ।
समारोहमे मैथिलीक वरिष्ठ साहित्यकार डा. राजेन्द्र विमल रमेशक नाटक मुर्दाक चर्चाक करैत मैथिलीक लेल एकटा महत्वपूर्ण पुस्तक बनल उल्लेख कएलन्हि अछि ।
मैथिली भाषाक पुस्तक प्रकाशनक संख्यामे वृद्धि भेल प्रति प्रशन्नता व्यक्त करैत डा. विमल कहलन्हि एतबे पर्याप्त नहि अछि, फेर व्यावसायिक रुप सँ कोना मैथिलीक पुस्तक सभ निकलैक ताहि पर सभकेँ ध्यान देबए पड़त ।
नेकपा एमालेक पोलिटव्यूरो सदस्य रामचन्द्र झा रमेश रञ्जनक साहित्य यात्राकेँ प्रशंसा करैत अपनो कृति जल्दिए प्रकाशन करब घोषणा कएलन्हि ।

गौरीनाथक मैथिली उपन्यास "दाग" केर पहिल अध्याय "ब्रह्म-शक्ति"क मंचन २५ नवम्बर २०१२ केँ


दाग (उपन्‍यास) : गौरीनाथ

बहुत दिन भेल, एक्कैस वर्ष, मातृभाषाक प्रति अनुरागक एक टा विशेष क्षण मे मैथिली मे लिखबाक लेल उन्मुख भेल रही—1991 मे— एहि एक्कैस वर्ष मे लगभग दू गोट कथा-संग्रह जोगर कथा आ दू गोट वैचारिक (आलोचनात्मक, संस्मरणात्मक आ विवरणात्मक) पुस्तक जोगर लेख यत्र-तत्र प्रकाशित आ छिडि़आयल रहितो ओकरा सभ केँ पुस्तकाकार संग्रहित करबाक साहस एखन धरि नइँ भेल। ई प्राय: अनके कारणेँ, जकर चर्चा बहुत आवश्यक नइँ। मुदा, ई उपन्यास एहि लेल पुस्तकाकार अपने सभक समक्ष प्रस्तुत क’ रहल छी जे एकरा पत्र-पत्रिका द्वारा प्रस्तुत करबाक सुविधा हमरा लेल नइँ छल। मुदा हमरा लग ई विश्वास छल जे मैथिलीक ओ पाठक वर्ग पढ़’ चाहताह जे प्राय: तेरह वर्ष सँ 'अंतिका’ पढ़ैत आयल छथि। मैथिली पत्रकारिताक दीर्घकालीन ओहि इतिहास—जे मैथिली पत्रिका पाठकविहीन आ घाटा मे बहराइत अछि—केँ फूसि साबित करैत जे पाठक वर्ग 'अंतिका’ केँ निरंतर 'घाटारहित’ बनौने रहलाह हुनक स्नेह पर हमरा आइयो विश्वास अछि। निश्चये ओ पाठक वर्ग हमर उपन्यास सेहो कीनिक’ पढ़ताह आ हमर पुरना विश्वास केँ आरो दृढ़ करताह।
—लेखक




Price : 150.00 INR
स्त्री आ शूद्र दुनू केँ हीन आ मर्दनीय मान’वला कुसंस्कृतिक अवसानक कथा जे अपन तथाकथित 'ब्रह्मïशक्ति’क छद्ïम अहंकार मे परिवर्तनक ईजोत देखिए ने पबै यए...जखन देख’ पड़ै छै तँ पाखंडक कील-कवच ओढि़ लै यए, अहुछिया कटै यए, घिनाइ यए आ अंतत: एक टा 'दाग’ मे बदलै यए जे कुसंस्कृतिक स्मृति शेषक संग परिवर्तनक संवाहक, स्त्री आ शूद्रक, संघर्ष-प्रतीक सेहो अछि।
उपन्यास पठनीय अछि, विचारोत्तेजक अछि आ मैथिली मे बेछप।

—कुणाल
गौरीनाथ मैथिलीक चर्चित आ मानल कथाकार छथि। पठनीयता आ रोचकता हिनकर गद्य मे बेस देखाइत अछि। माँजल हाथेँ ओ ई उपन्यास लिखलनि अछि। गौरीनाथ मैथिली साहित्यक आँगुर पर गनाइ वला लेखक मे छथि जे जाति-विमर्श केँ अपन विषय वस्तु बनौलनि। आन भारतीय भाषा मे साहित्यक जे लोकतांत्रिकीकरण भेल, तकर सरि भ’क’ हेबाक मैथिली एखनो प्रतीक्षे क’ रहल अछि। ई उपन्यास मैथिली साहित्यक लोकतांत्रिकीकरण लेल कयल एक टा सार्थक आ सशक्त प्रयास अछि।
'दाग’ अनेक अंतद्वंद्व सबहक बीच सँ टपैत अछि विश्वसनीयता, रोचकता आ लेखकीय ईमानदारीक तीन टा तानल तार पर एक टा समधानल नट जकाँ। एत’ सामंतवाद आ ब्राह्मणवादक मिझेबा सँ पहिनेक दीप सनहक तेज भ’ जायब देखाइत अछि। धुरखुर नोचैत नपुंसक तामस आ वायवीय जाति दंभ अछि। नवतुरियाक आर्थिक कारणेँ जाति कट्टरताक तेजब सेहो। दलित विमर्श अछि, ओकर पड़ताल सेहो। दलितक ब्राह्मणीकरण नहि भ’ जाय, तकरो चिंता अछि। दलित विमर्शक मनुष्यतावाद आ स्त्रीवादक नजरिञे पड़ताल सेहो।
आकार मे बेसी पैघ नहियो रहैत एहि मे क्लासिक सब सनहक विस्तार अछि अनेक रोचक पात्रक गाथाक बखान संग। आजुक मैथिल गाम जेना जीवंतता सँ एहि उपन्यासक पात्र बनि केँ सोझाँ अबैत अछि, से अनायासे फणीश्वरनाथ रेणु केँ मन पाडि़ दैत अछि। गामक नवजुबक सबहक दल यात्रीक नवतुरियाक योग्य वंशज अछि।
जँ आजुक मिथिला, ओकर दशा-दिशा आ संगहि ओत’ होइत सामाजिक परिवर्तन रूपी अमृत मंथनक खाँटी बखान चाही, तँ 'दाग’ केँ पढ़ू।
एहि रोचक आ अत्यंत पठनीय उपन्यासक व्यापक पाठक समाज द्वारा समुचित स्वागत हैत आ गाम-देहात सँ ल’क’ नगर परोपट्टा मे एहि पर चर्चा हैत, एहेन हमरा पूर्ण विश्वास अछि।
—विद्यानन्द झा
स्त्री आ दलित एहि दुनू विमर्श केँ एक संग समेट’वला उपन्यास हमरा जनतब मे मैथिली मे नहि लिखल गेल अछि। ई उपन्यास एहि रिक्ति केँ भरैत भविष्यक लेखन लेल प्रस्थान-विन्दु सेहो तैयार करैत अछि।
'दाग’ अपन कैनवास मे यात्रीक 'नवतुरिया’ आ ललितक 'पृथ्वीपुत्र’क संवेदना केँ सेहो विस्तार प्रदान करैत अछि। ताहि अर्थ मे ई मैथिली उपन्यास परंपराक एक टा महत्त्वपूर्ण कड़ी साबित हैत। 'नवतुरिया’क 'बम-पार्टी’क विकास-यात्रा केँ 'गतिशील युवा मंच’ मे देखल जा सकैत अछि। जाति, धर्म, लिंग आदि सीमाक अतिक्रमण करैत मनुष्य ओ मनुष्यताक पक्ष मे लेखकीय प्रतिबद्धताक प्रमाण थिक सुभद्रा सनक पात्रक निर्माण जे अपन दृष्टि सँ जातीय-विमर्श सँ आगाँक बाट खोजैत अछि, 'पहिने मनुष्य बचतै तखन ने प्रेम!’
अभिनव कथ्य आ शिल्पक संग मिथिलाक नव बयार केँ थाह’वला उपन्यास थिक 'दाग’।
—श्रीधरम



उसार-पुसार


ई उपन्यास हम लगभग दस वर्ष पहिने लिखब शुरू कयने रही। 2003 मे। एक्कैसम शताब्दीक नव गाम मे तखन धरि जे किछु थोड़ेक सामाजिकता बचल छल, एहि बीच सेहो खत्म जकाँ भ’ गेल। खगल केँ के देखै यए, हारी-बीमारी धरि मे तकैवला नइँ! अहाँक नीक जरूर दोसर केँ अनसोहाँत लगै छै। लोभ-लिप्साक पहाड़ समस्त सम्बन्ध आ हार्दिकता केँ धंधा आ नफा-नुकसान सँ जोडि़ देलक अछि।...गाम सँ बाहर रह’वला भाइ-भातिज केँ बेदखल करबाक यत्न बढ़ल अछि। खेती-किसानीक जगह व्यापार आ बाहरी पाइ पर जोर। सुखितगर होइते लोक शहर जकाँ आत्मकेन्द्रित भ’ रहल अछि आकि नव तरहक दबंग बनि रहल अछि, नंगटै पर उतरि रहल अछि। संगहि की ई कम दुखद जे जाति-धर्म, पाँजि-प्रतिष्ठा सनक मामिला मे एखनो; थोड़े कम सही; उग्र कोटिक सामाजिक एकता, आडम्बर आ शुद्धता देखाइते अछि?...
सवर्ण समाज दलित-अछूतक कन्या पर अदौ सँ मोहित होइत रहल आ एम्हर आबि विवाह आदिक सेहो अनेक घटना सोझाँ आयल। मुदा दलित युवकक संग गामक सिरमौर पंडितजीक कन्याक भागि जायब, घर बसायब आ ओकर स्वावलंबी हैब पागधारी लोकनि केँ नइँ अरघैत छनि तँ एकरा की कहबै?
खेतिहर समाज लेल खेती-किसानी सँ बढि़ ताग आ पाग कहिया धरि रहत से नइँ कहि सकब!...
ओना मिथिला-मैथिल-मैथिलीक मामिला मे 'पूबा-डूबा’क हस्तक्षेप पश्चिमक श्रेष्ठता-ग्रंथि केँ कहियो स्वीकार्य नइँ रहल—खासक’ शुद्धतावादी लोकनि आ पोंगा पंडित लोकनि केँ!...
निश्चये ओहेन व्यक्ति केँ मैथिल समाजक ई पाठ बेजाय लगतनि जे मनुक्ख आ मनुक्ख मे भेद करै छथि, एक केँ श्रेष्ठ आ दोसर केँ हीन बुझैत छथि!...
सिमराही-प्रतापगंज-ललितग्राम-फारबिसगंज बीचक आ कात-करोटक 'पूबा-डूबा’ गाम-घरक किछु शब्द (ककनी, कुरकुटिया, ढौहरी, दोदब आदि), किछु ध्वनि, भिन्न-भिन्न तरहक उच्चारण आ वर्तनीक विविधता कोसी-पश्चिमक किछु पाठक केँ अपरिचित भनहि लगनि, आँकड़ जकाँ प्राय: नइँ लगबाक चाहियनि किएक तँ कोसी पर नव बनल पुल चालू भ’ गेल अछि...जाति मे भागनि आकि अजाति मे, बेटी-बहिन घर-घर सँ भागबे करतनि...ताग आ पाग धयले रहि जयतनि!...नव-नव बाट आ पुल आकर्षक होइत छै! से जनै अछि छान-पगहा तोड़बा लेल आकुल-व्याकुल नव तुरक मैथिल कन्या! हँ, पंडिजी बुझैतो तकरा स्वीकार’ नइँ चाहैत छथि।
उपन्यासक अन्तिम पाँति पूरा क’ हम विश्रामक मुद्रा मे रही...कि पंडीजी, माने पंडित भवनाथ मिश्र, आबि गेलाह। पुछलियनि—पंडित कका, अंकुरक प्रश्नक उत्तर के देत? कहू, ओकर कोन अपराध?... पंडित कका किछु ने बजलाह, बौक बनि गेलाह!...मुदा हुनका आँखि मे अनेक तरहक मिश्रित क्रोध छलनि! ओ पहिने जकाँ दुर्वासा नइँ भ’ पाबि रहल छलाह, मुदा भाव छलनि—खचड़ै करै छह! हमरा नाँगट क’क’ राखि देलह आ आबो पुछै छह...जाह, तोरा कहियो चैन सँ नइँ रहि हेतह!...
अंकुरक छाती पर जे दाग अछि, तेहन-तेहन अनेक दाग सँ एहि लेखकक गत्र-गत्र दागबाक आकांक्षी पंडित समाज आ विज्ञ आलोचक लोकनि लग निश्चये अंकुरक सवालक कोनो उत्तर नइँ हेतनि। सुभद्राक तामस आ ओकर नजरिक दापक दाग सेहो हुनका लोकनिक आत्मा पर साइत नहिए बुझाइत हेतनि!... मुदा सुधी पाठक, दलित समाज सँ आगाँ आबि रहल नवयुवक लोकनि आ स्त्रीगण लोकनिक नव पीढ़ी जरूर एकर उत्तर तकबाक प्रयास करत, से हमरा विश्वास अछि।
—गौरीनाथ
01 सितम्बर, 2012

Tuesday, November 6, 2012

समन्वय २-४ नवम्बर २०१२ इण्डिया हैबीटेट सेन्टर भारतीय भाषा महोत्सव SAMANVAY 2-4 November 2012 IHC INDIAN LANGUAGES' FESTIVAL/ २ नवम्बरकेँ प्रारम्भ भेल -ज्योतिरीश्वर पूर्व विद्यापतिक जीवनपर आधारित "उगना रे" पर कथक नृत्यांगना शोभना नारायणक नृत्य लोककेँ मंत्रमुग्ध केलक/ ३ नवम्बरकेँ मैथिलीमे ब्राह्मणवाद, ज्योतिरीश्वरपूर्व विद्यापति आ मैथिलीमे प्रेमक गीतपर भेल बहस

-समन्वय २-४ नवम्बर २०१२ इण्डिया हैबीटेट सेन्टर भारतीय भाषा महोत्सव SAMANVAY 2-4 November 2012 IHC INDIAN LANGUAGES' FESTIVAL/

-२ नवम्बरकेँ प्रारम्भ भेल -ज्योतिरीश्वर पूर्व विद्यापतिक जीवनपर आधारित "उगना रे" पर कथक नृत्यांगना शोभना नारायणक नृत्य लोककेँ मंत्रमुग्ध केलक

 - ३ नवम्बरकेँ मैथिलीमे ब्राह्मणवाद, ज्योतिरीश्वरपूर्व विद्यापति आ मैथिलीमे प्रेमक गीतपर भेल बहस -बहसमे भाग लेलनि उदय नारायण सिंह नचिकेता, देवशंकर नवीन, विभा रानी आ गजेन्द्र ठाकुर; आ मोडेरेटर रहथि अरविन्द दास -आकाशवाणी दरभंगा, हिन्दी अखबार सभक दरभंगा संस्करण, सी.आइ.आइ.एल. , साहित्य अकादेमी, नेशनल बुक ट्रस्ट आ अंतिका- मिथिला दर्शन, जखन-तखन, विद्यापतिकेँ पाग पहिरा कऽ विद्यापति पर्व केनिहार चेतना समितिक पत्रिका घर बाहर, झारखण्ड सनेस आदिक मैथिली साहित्यकेँ ब्राह्मणवादी बनेबाक प्रयासक विरुद्ध गएर ब्राह्मणवादी समानान्तर धाराक चर्च गजेन्द्र ठाकुर द्वारा भेल भेल -ज्योतिरीश्वर पूर्व गएर ब्राह्मण विद्यापति आ ज्योतिरीश्वरक पश्चात बला कट्टर संस्कृत-अवहट्ठ बला विद्यापतिक बीच अन्तर गजेन्द्र ठाकुर रेखांकित केलन्हि ऐ सँ पहिने हिनी आ मणुपुरीक कार्यक्रम सेहो भेल

_MAITHILI -LOVE's OWN LANGUAGE03 NOVEMBER 2012
-समन्वय २-४ नवम्बर २०१२ इण्डिया हैबीटेट सेन्टर भारतीय भाषा महोत्सव SAMANVAY 2-4 November 2012 IHC INDIAN LANGUAGES' FESTIVAL/
UGNA RE BY SHOBHNA NARAYAN 02 NOVEMBER 2012
-समन्वय २-४ नवम्बर २०१२ इण्डिया हैबीटेट सेन्टर भारतीय भाषा महोत्सव SAMANVAY 2-4 November 2012 IHC INDIAN LANGUAGES' FESTIVAL/ २ नवम्बरकेँ प्रारम्भ भेल

Wednesday, October 31, 2012

समन्वय २०१२ आमंत्रण



साहित्य अकादेमी, दिल्लीक मैथिलीक आठम महिला समन्वयक डॉ. वीणा ठाकुर हेती

-साहित्य अकादेमी, दिल्लीक मैथिलीक आठम महिला समन्वयक डॉ. वीणा ठाकुर हेती, ई सूचना अशोक अविचल देलन्हि।

-एकर कार्यकाल पाँच साल लेल होइ छै।



DR. VEENA THAKUR KE BADHAI


Sahitya Akademi Nayi Delhi ker Maithili paramarshdatri samitik pahil sanyojak banak saubhagya Dr. Veena Thakur kein Bhetlain. nishchiten Maithili kein yogya karmath aa sahitya anuragi vidhusi pratinidhi bhetlaik. Jharkhand Maithili sahitya manch Jamshedpur aa Jharkhand Maithili Bhojpuri Sahitya Sangam dis san Dr. Thakur kein Badhai

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  • Amit Mishra and Ashish Anchinhar like this.
  • Ashish Anchinhar आशा अछि जे वीणा ठाकुर जी अपन एडवाइजरी बोर्डमे कबिलपुरक शंकरदेव झा-विजयदेव झा आदिकेँ दूर रखती आ 9 टा सदस्यमे सँ कमसँ कम 5 टा सदस्य गएर सवर्णकेँ रखती।
  • Gajendra Thakur पहिल रमानाथ झा, दोसर जयकान्त मिश्र, तेसर सुरेन्द्र झा सुमन, चारिम सुरेश्वर झा, पाँचम रामदेव झा, छअम रामदेव झाक ससुर चन्द्रनाथ मिश्र अमर, सातम रामदेव झाक समधि विद्यानाथ झा विदित आ आठम वीणा ठाकुर। साहित्य अकादेमीक मैथिली विभागक समन्वयक सूचीक ई आठम लगातार मैथिल ब्राह्मण समन्वयक हेतीह। 9 अ म जँ मैथिले ब्राह्मण बनि जाए तँ लगातार तेसर हैट्रिक बनि जाएत, जइ रेकॉर्डकेँ साहित्यकार कि क्रिकेटरो नै तोड़ि सकत।
    39 minutes ago · Like · 1
  • Ashok Avichal kam sa kam sahityan ke jatiwaad san pharak rakhak prayas hoit rahak chahi.. Veena Thakur matra maithil brahman nai Maithilik Sahityakar aa pahil Mahila chith
  • Gajendra Thakur मुदा ई पहिल महिला छथि से कने-मने आशाक किरण छोड़ैए। तेँ वीणा ठाकुर जीकेँ बधाइ।
    31 minutes ago · Like · 2
  • Gajendra Thakur मुदा आशीष अनचिन्हार जीक गपसँ हम सहमत छी। जेना रामदेव झाक बेटा आदि अजित आजादपर "विदित" केँ ५०-६० लाख देबाक आरोप आ नचिकेता आदिपर जातिगत/ व्यक्तिगत घृणित आरोप लगेने रहए (आज अखबारमे) से की सिद्ध करैए? की वीणा ठाकुर रामदेव झा-शंकरदेव झा- चन्द्र नाथ मिश्र क कैंडीडेट छली? आशीष अनचिन्हार जीक ऐ सलाह सँ सहमत छी जे "वीणा ठाकुर जी अपन एडवाइजरी बोर्डमे कबिलपुरक शंकरदेव झा-विजयदेव झा आदिकेँ दूर रखती आ 9 टा सदस्यमे सँ कमसँ कम 5 टा सदस्य गएर सवर्णकेँ रखती।"
  • Gajendra Thakur आ जे से नै करती तखन पहिल महिला समन्वयकक मैथिलीकेँ की लाभ हएत, आ तकर परिणाम मैथिली लेल भयंकर हएत।
  • Ashok Avichal vishwas aich je veena thakur yogya aa maithili lel samarpit sahityakar sabkein sadasya banebak kaal prathmikta detih
  • Gajendra Thakur जे संस्था सभ हुनका चुनलकन्हि अछि ओइमेसँ अधिकतर फर्जी छै, जकरा साहित्यसँ कोनो मतलब नै छै, ओही सभक सदस्य सभ भूतकालमे एडवाइजरी बोर्डमे चुनाइत आएल अछि।
  • Gajendra Thakur "योग्य" माने मात्र मैथिल ब्राह्मण नै भऽ जाए अशोक अविचलजी।
    14 minutes ago · Like · 1
  • Gajendra Thakur साहित्यकेँ जाति-पातिसँ दूर रखबाक चाही, ई सभ मैथिल ब्राह्मण साहित्यकार सभसँ सुनैत-सुनैत हमर कान पाकि गेल अछि। कोन तरहक हिप्पोक्रेसी अहाँ लोकनि कऽ रहल छी अशोक अविचलजी। दुनियाँ सभ देखि रहल अछि। इतिहास अहाँकेँ माफ नै करत। "शब्दशास्त्रम्" कथा जे हम "उमेश मण्डल"केँ समर्पित केने छलौं, ओ समर्पणक पाँती कोना अहाँ अपन सम्पादकत्वमे प्रकाशित "कथा पारस"सँ हटा देलिऐ। जँ ओ समर्पण "उमेश झा" केँ रहितै तँ अहाँ ओ पाँती हटबितिऐ अशोक अविचलजी?
    6 minutes ago · Like

    • Poonam Mandal ''आशा अछि जे वीणा ठाकुर जी अपन एडवाइजरी बोर्डमे कबिलपुरक शंकरदेव झा-विजयदेव झा आदिकेँ दूर रखती आ 9 टा सदस्यमे सँ कमसँ कम 5 टा सदस्य गएर सवर्णकेँ रखती।'' वि‍चारणीय अछि‍।
    • Arbind Kumar Yadav जे संस्था सभ हुनका चुनलक ओइमेसँ अधिकतर फर्जी अछि‍, जकरा साहित्यसँ कोनो मतलब नै छै, ओही सभक सदस्य सभ भूतकालमे एडवाइजरी बोर्डमे चुनाइत आएल अछि। ''साहित्य अकादेमीक मैथिली विभागक समन्वयक सूचीक ई आठम लगातार मैथिल ब्राह्मण समन्वयक छथि‍।''
    • Rabindra Kumar Choudhary akan dhair jha wa misar sanyojak hoiat rahlah achhi. pahil ber thakur bhelih achhi.badlab suru bha ghel achhi.
    • Ashish Anchinhar ई ठाकुर बाभन छथि हजाम नै
      5 hours ago via mobile · Like · 1
    • Umesh Mandal Rabindra Kumar Choudhary जी, झा आ मि‍श्रक जगह ठाकुर भेलीह जेकरा अहाँ बदलाव कहै छि‍ऐ; ई कोन बदलाव भेलै?


    • Gajendra Thakur ई विजदेव झाक पिताक नाम रामदेव झा आ नानाक नाम चन्द्रनाथ मिश्र अमर छियन्हि। गरिखर मे दुनू नामी- दुनू पक्षसँ ई गुण हिनका आनुवंशिक रूपेँ तँ नै आबि गेल छन्हि!!
    • Umesh Mandal शंकरदेव झा हमरा कहने छथि जे सभ भाँइ दस सदस्यीय साहित्य अकादेमीक एडवाइजरी कमेटीक सदस्य रूपमे नै एता, आ ईहो कहने रहथि "जे जँ हम सभ मेम्बर बनी तँ रामदेव झाक बेटा नै होइ"। कतेक दिन पुरान गप भऽ गेलै। अजित आजादसँ चर्च भेल तँ ओ कहलनि- "धुर छोड़ू एकर सभक किरिया खायबक कोनो माइन नै छै, गिरल सभ छै..."।- देखा चाही आगाँ की होइए।
      Ashish Anchinhar मने जे जँ शङ्करदेव आ हुनक भाए आदि साहित्य अकादेमीक कोनो पद लेता तँ ओ रामदेवक बेटा नै हेता सएह ने
      about a minute ago via mobile · Unlike · 1
      Pawan Kumar Sah पहिल रमानाथ झा, दोसर जयकान्त मिश्र, तेसर सुरेन्द्र झा सुमन, चारिम सुरेश्वर झा, पाँचम रामदेव झा, छठम रामदेव झाक ससुर चन्द्रनाथ मिश्र अमर, सातम रामदेव झाक समधि विद्यानाथ झा विदित आ आठम वीणा ठाकुर; एकछाहा झा.. मि‍सर... बाभन ठाकुर...!!!!!! कहि‍या तक चलैत रहत ई खेल?? की हि‍नकासँ कमजोर केण्‍डीडेट छलखि‍न्‍ह प्रोफेसर उदय नारायण सिंह 'नचि‍केता'? की हि‍नकासँ सौ गुणा अधि‍क काज नचि‍केता जी नहि‍ केने छथि‍न्‍ह मैथि‍ली लेल? मुदा तैयो श्री गजेन्‍द्र ठाकुर जीक बातपर ''महिला छथि से कने-मने आशाक किरण छोड़ैए।'' आश अछि‍, मुदा से तँ गड़गड़ेलेपर बूझब।

    -चोर रोशन कुमार झा अखनो नै हटेलक जगदीश प्रसाद मण्डलक ओकरा (चोर रोशन कुमार झा ) द्वारा कएल चोरिक लघुकथा सभ अपन ई-पत्रिका (ब्लॉग)सँ- साहित्यिक जगतमे ऐ सँ घोर क्षोभ अछि- चोर आ ओकर अधीनस्थ सम्पादक-सहयोगीपर कार्रवाइपर विचार

    -चोर रोशन कुमार झाक चोरिक सबूत नीचाँ लिंकमे अछि जे ओ अखन धरि अपन ई-पत्रिका (ब्लॉग) सँ डिलीट नै केलक अछि। ओकर एकटा आर ई-पत्रिका (ब्लॉग) छै जैमे ओकर अधीनस्थ सम्पादक अमलेन्दु शेखर पाठक आ सहयोगी कुमार शैलेन्द्र, शंकरदेव झा आदि छै। एकर अतिरिक्त मिथिलांगनसँ जुड़ल रवीन्द्र दासक सेहो ऐ चोरक प्रति सहानुभूति छै।

    -

    -जगदीश प्रसाद मण्डलक रचनाक केलक चोरि-
    चोरिक लिंक नीचाँ देल जा रहल अछि:
     http://mithlakgaamghar.blogspot.in/2012/05/rikshaavala.html
    http://mithlakgaamghar.blogspot.in/2012/05/jivika.html
    http://mithlakgaamghar.blogspot.in/2012/05/blog-post_7993.html
    http://mithlakgaamghar.blogspot.in/2012/05/blog-post_9212.html
    http://mithlakgaamghar.blogspot.in/2012/05/blog-post_4646.html
    http://mithlakgaamghar.blogspot.in/2012/05/blog-post_691.html
    http://mithlakgaamghar.blogspot.in/2012/05/blog-post_88.html
    http://mithlakgaamghar.blogspot.in/2012/05/blog-post_7693.html
    http://mithlakgaamghar.blogspot.in/2012/05/blog-post_4876.html
    http://mithlakgaamghar.blogspot.in/2012/05/blog-post_31.html


    ई धूर्त रोशन कुमार झा ई सभ रचना जगदीश प्रसाद मण्डलक " गामक जिनगी" सँ चोरा कऽ अपन ई-पत्रिकामे छपने अछि जेकर लिंक ऊपर देल गेल अछि। गामक जिनकीकेँ मैथिलीक पहिल टैगोर पुरस्कार भेटल छै।

    पहिनहियो एकर संगी रण्जीत चौधरी मुन्नाजीक रचनाक लगातार चोरिमे पकड़ाएल अछि, जे अजित आजादक  मिथिलाक अबाज पर अखनो अछि। अजित आजाद मुन्नाजीकेँ कहने रहथिन्ह जे ओ रण्जीत चौधरीकेँ बैन करताह आ चोरिक रचनाकेँ डिलीट करताह, मुदा हुनकर कार्यालसँ से अखन धरि से नै भेल तावत ओही कार्यालयसँ ई नबका चोर रोशन कुमार झा आबि गेल।

    ऐ चोरक संरक्षक अमलेन्दुशेखर पाठक (जिनकर पिता शिवकान्त पाठक रामदेव झा आदिक संग आकाशवाणी दरभंगा खोलने छथिन्ह, जे रोशन झाक निचुक्का ब्लैकमेल पत्रसँ सिद्ध होइत अछि, कारण ओ जकरा चाहता तकरा अमरसँ रोशन झा धरिकेँ आकाशवाणीमे कार्यक्रम देता आ गौहाटीक विद्यापति पर्वक आयोजक ककरा कहियाक टिकट पठबै छथि से ओ हिनके आ बैजू सँ पुछि कऽ आगाँसँ पठेथिन्ह!!), शंकरदेव झा आदि छथि जकरा संगे मिलि कऽ ई ब्लॉग (ई-पत्रिका) चलबैत अछि।
    -ऐ संगठित चोरिमे रोशन कुमार झा, रणजीत चौधरी आदि प्यादा अछि, मुख्य खिलाड़ी यएह सभ छै।
    -पूर्वपीठिका देखू http://esamaad.blogspot.in/2012/08/blog-post_4877.html



    रोशन कुमार झा जे रचना चोरि केलक तकर सरगना सभक चिट्ठी/ किरदानी आदि नीचाँमे अछि

    मातृभाषा: मैथिलि पाक्षिक ई-पत्रिका(!!)

    जे की दरभंगास प्रकाशित पहिल ई-पत्रिका अछि . एकर पहिल अंक छपी चुकल अछि . जेना की सर्वविदित अछि जे अहि स पहिने विदेह ई-पत्रिका सेहो निकली रहल अछि . विदेह साहित्य लेल काज त कैरते अछि मुदा एक टा काज ओ बखूबी क रहल अछि आ दिन प्रतिदिन क रहल अछि . ओ काज अछि जातिवादिताक नाम पर झगरा केनाइ साहित्यकार सभ केर खुलेआम फसबूक आ ब्लोगक माध्यम स गारि पढ्नाई .
    मातृभाषा ई-पत्रिकाक अंक देखैत देरी नहीं जानी किया गजेन्द्र ठाकुरअक देह में आगि किअक लागी गेलें आ ओ अपन चेला चपाटीकेर पुनः मैदान में लड़बाक लेल उतारी देलैन . हुनक एक टा चेला जिनकर नाम उमेश् मंडल छियैन ओ अपन घरवाली केर ब्लॉग ईसमदिया पर एक टा पोस्ट केलें जे फल फल आदमी मिलि ब्लाच्क्मैलिंग  करबाक उद्देश्य स अहि पत्रिकाक शुरुआत केलक अछि . विदेह फसबूक ग्रुपअक एक टा पोस्ट पर माननीय आशीष अनचिन्हार आ उमेश मंडल जी कमेन्ट देला जे मा
    तृभाषा ई-पत्रिकाक सम्पादक महान ब्रह्मण वादी अमलेंदु शेखर पाठक छैथ .

    अमलेंदु शेखर पाठक मैथिलिक साहित्यकार , दरभंगा रेडिओ स्टेशनअक उद्घोषक आ वरिस्थ पत्र्रकार छैथ . आब सवाल उठैत अछि जे एहन आदमी पर उमेश मंडल जी ब्रह्मण वादी हेबाक आरोप किअक लगा रहल छैथ .

    अहि सवालक जवाब लेल किछु समय पाछू घुर पडत . रेडिओ स्टेशन स एक दिन पाठक जी उमेश मंडल केर फ़ोन केल्थिन जे अपनेक पोस्टल एड्रेस की अछि ? उमेशक पुछला पर पाठक जी कहलें जे आहाक रेडिओ में कथा पढबा हेतु छित्ती पता रहल छि . उमेशक काटन छल जे हमरा बदला ज हमर पिताजिकर अवसर देब त हमरा नीक लागत . पाठक जी कहलें जे आहा चिंता जुनी करू हम दुनु गोटेक अवसर देब . ओही दिन स पाठक जी ओही उमेश लेल भगवान् छल आ बहूत दिन रहबो केला . तखन उमेश आ हुनका किअक गाडिया रहल छैन .
    पछिला बरख गुवाहाटी में अंतर रास्ट्रीय मैथिलि सम्मलेन भेल छल ओही थाम २ दिवसीय कार्यक्रमअक आयोजन छल . पहिल दिन कवि घोस्थी आ दोसर दिन विद्यापति समारोह . उमेश मंडल आ हुनक पिताजी केर दोसर दिनक आयोजनक लेल आमंत्रित कैल गेल छल , मुदा महा साहित्यकार उमेश मंडल एक दिन पहिने गुवाहाटी पहुँच गेला . उमेश पाठकजी स आग्रह केलें जे हाम्रो पिताजी केर कविता पढबा लेल बजेबैं अपनेक आभारी रहब . मुदा समय कम रहबाक आ कवि बेसी हेबाक कारण उमेशक आग्रह पाठक जी नहीं पूरा का सकला अहि कारने जे आदमी हुनका नजरी में आई धरी भगवान् छल से आबी ब्राह्मण वादी बनी गेल छल .
    विदेह केर एहो कास्ट छैन जे दोसर ई-पत्रिका किअक निकली रहल अछि . कारण साफ़ अछि जाहि पत्रिकाक सम्पादक मंडली लोकनि अपन समय झगरा आ गारि पढबा में बितेता टा निक रचना कतय स छपता .

    "राड़केँ सुख बलाय" केर लेखक रोशन कुमार झा रामदेव झाक बेटा, विद्यानाथ झा विदितक जमाए आ चन्द्रनाथ मिश्र "अमरक" नैत शंकरदेव झा-विजयदेव झाक संग मिलि कऽ एकटा ब्लैकमेलिंग ब्लॉग ई-पत्रिका (!!) मातृभाषा शुरू केलक अछि।(रिपोर्ट पूनम मण्डल)
    राड़केँ सुख बलाय" केर लेखक रोशन कुमार झा रामदेव झाक बेटा, विद्यानाथ झा विदितक जमाए आ चन्द्रनाथ मिश्र "अमरक" नैत शंकरदेव झा-विजयदेव झाक संग मिलि कऽ एकटा ब्लैकमेलिंग ब्लॉग ई-पत्रिका मातृभाषा शुरू केलक अछि।
    धूर्त रोशन कुमार झा:राअर के सुख बले :
    मिथिलाक गाम घर :

    राअर के सुख बले :

    पढुआ काका किछु काज स दरभंगा आयल छलाह . जखन सव काज भ गेलैन त बस पकर्बाक लेल बस स्टैंड गेलाह , मुदा गामक बस छुट्टी गेलैन .
    पधुआ काका हमरा फ़ोन केलैने ? रोशन कतय छ: ? हम आकाशवाणी लग ठाढ़ छि ? हाउ हम तोहर घरे बिसरी गेलिय . तो आबी क हमरा ल जा .

    जखन हम पढुआ काका क ल के घर पर आय्लाहू त घर पर लाइन छल .चुकी गर्मी काफी छल ताहि कारने पंखा चला हुनका लग बैसी गेलहु आ हुनका अपन कंप्यूटर पर फसबूक के खोली हुनका देखाबय लाग्लाहू ?
    अचानक ललका पाग केर देखैत देरी हुनक मन गडद-गडद भ गेलैने . ओ कह्लैने जे की " इ थिक मिथिला वासी केर पहचान , आ पाग पहिर्ला स बाढ़ी जाइत अछि मान "

    हम कहलियैक , काका किछू लोक केर कथन अछि जे की पाग मात्र उपनयन , विवाह में पहिरे वाला एक टा परिधान अछि जे की बाभन आ लाला सब मे पहिरल जाइत अछि ?

    ओ कह्लैने हौ जे इ गप करैत अछि ओ पागल हेताह ?
    हम कहलियैक , कका ओ सब पढ़ल लिखल आ पैघ-पैघ साहित्यकार छैथ आ विदेह सनक पत्रिका सेहो निकालैत छैथ ?

    किछु काल केर उपरान्त पढुआ कका कह्लैने जे की एकटा , दूटा ओही महानुभाव केर नाम त कहक जे सब पाग केर मिथिला केर मान नहीं बुझैत अछि आ मात्र ओकरा जातिगत स जोरी रहल अछि ?

    हम कहलियैक आशीष अनचिन्हार , उमेश मंडल , पूनम मंडल प्रियंका झा आ विदेह केर सम्पादक गजेन्द्र ठाकुर .
    कका कह्लैने हौ अहि मे त कोनो पैघ साहित्य कार लोकनि केर नाम कहा अछि ?
    कका आजुक समय केर इ सब करता धर्ता छैथ साहित्य जगत के .
    हौ यदि आजुक साहित्य केर करता एहन छैथ त नहीं जानी की होयत भविष्य मे ?

    हमरा सब केर समर में हरिमोहन झा , नागार्जुन , दिनकर सब सनक महान रचना कार लोकिन छलाह . से इ सब कोनो हुनका स पैघ छैथ जखन ओ लोकिन पाग पहिर अपना केर गौरवान्वित बुझैत छलाह तखन आजुक नौसिखुआ सब के की औकात ?

    ओ कह्लैने हौ बाऊ ब्रह्मण एकर विरोध किअक क रहल अछि से नहीं जानी मुदा जिनकर बाप दादा कहियो पहिर्बे नहीं केने हैथ हुनका त अवस्य ने असोहाथ बुझेतैन .
    ओहुना मिथिलाक गाम घर मे कहल जाइत अछि जे की " राअर केर सुख बले " .
     ·  ·  · 3 hours ago


    • 9 minutes ago ·  · 1

    • Ashish Anchinhar एहि पत्रिका केर सम्पादक महान ब्राम्हणवादी अम्लेन्दु शेखर पाठक अछि
      9 minutes ago via mobile ·  · 1

    • Umesh Mandal जगदीश प्रसाद मण्डल जीकेँ गौहाटी विद्यापति समारोहमे मुख्य अतिथि बनाओल गेलापर वैद्यनाथ बैजू आ अमलेन्दु शेखर पाठक आदि हंगामा केने रहथि, अमलेन्दु शेखर पाठक कहि रहल रहथि "सपनोमे नै सोचने हेतै", एकर वीडियो देखू www.purvottarmaithil.org पर



    रणजीत चौधरी
    Ashish Anchinhar
    अजित आजाद नहिये अखन धरि माफी मंगने छथि आ नहिये अखन धरि ऐ रणजीत चौधरीक आइ.डी.केँ प्रयोग वा सह देनाइ बन्ने केने छथि। एकर प्रमाण अछि जे एतेक बेइजत्तीक बादो ओ अपन "मिथिला अवाज" ग्रुपपर ऐ फेक द्वारा (नमस्कार मिथिला जेकरा फेक नै कहि रहल छथि, तँ प्रमाणित भेल जे ई तूनू मिलल छथि)मुन्नाजीक चोरि कएल गजल अखनो विराजमान अछि, ने ऐ फेक पर कोनो कार्वाइ कएल गेल छै। साबित भेल वा बाकी अछि? मुदा ई लोकनि माफी कोना मंगता। पहिने नवारम्भ पत्रिकामे त्रिकालज्ञक फेक आइ.डी.सँ अजित आजाद जे धंधा करै/ करबै छलाह से "मिथिला अवाज" मे रणजीत चौधरीक माध्यमसँ करबा रहल छथि। नमस्कार मिथिला जी, ऐ रणजीत चौधरीकेँ अहाँ चिन्है छिऐ ने, आ अजित बाबू सेहो चिन्है छथिन्ह, तखन ओ मुन्नाजीकेँ किए कहलखिन्ह जे ओ रणजीत चौधरीकेँ नै चिन्है छथिन्ह? की ई फेक आइ.डी. वा अहाँ सभक छाया मिइत्र मिथिला अवाज कार्यालयसँ ई कुकृत्य तँ नै कऽ रहल अछि?

    अमलेन्दु शेखर पाठकक आ बैजू आदिक कुकृत्यक वीडियो आब www.purvottarmaithil.org
    तकर बाद एकरा सभकेँ मंचपर सेहो बजाओल गेलै आ ई निर्लज्जतासँ टीक नुरियाबैत ओतऽ पहुँचल।


    रणजीत चौधरी नाम्ना एकटा फेक आइ.डी.द्वारा मुन्नाजीक गजल चोरि कऽ कए मिथिला अवाज ग्रुप (संचालक अजित आजाद) पर देल जा रहल अछि। हमरा शंका अछि जे ई फेक आइ.डी. अजित आजाद द्वारा द्वारा संचालित अछि वा ओकरा द्वारा सह देल जा रहल अछि


    रामदेव झाक मूर्ख बेटा विजयदेव झाक फोन नम्बरसँ उमेश मण्डलकेँ पठाओल एस.एम.एस.

    "गजेन्‍द्रक पोसुआ अपन परतर हमर परि‍वारसँ जुनि‍ करू बाउ आ फेसबुकपर जे नाटक क' रहल छी ओइसँ पैघ नाटक हमरा अबैए। कहबी छै फल्‍लाँ धोबीकेँ लूरि‍सँ बनल भगता मंडल अपन बापकेँ परतर आ तुलना ककरासँ क' रहल छी बाउ पहने फल्‍लाँ धो आउ तखन हमरा परि‍वारक योगदानपर चर्चा करब बाउ अपनेक पि‍ताकेँ कोना अकेदमी एवार्ड भेटल आब ओइपर अहाँ लेख पढ़ब बुरी रे लि‍खनाइ की होइ छै से हम सीखा देब।"

    महेन्द्र मलंगियाक मूर्ख बेटा ललित कुमार झाक हाथ जे रामदेव झाक मूर्ख बेटा विजयदेव झाक फोन नम्बरसँ उमेश मण्डलकेँ पठाओल ऐ एस.एम.एस. सँ सिद्ध होइए।

    "बहुत-बहुत धन्यवाद, समदिया पहिल बेर नीक समाचार सुनौलक हमरा, हमर एक हेराएल मित्र हमरा नाइजीरियासँ फोन केलनि, फूइसक खेती चालू रहय मण्डल"
    (+२३४८०३९४७२४५३नाइजिरिया  ललित कुमार झा) (विजयदेव झा  +९१९४७०३६९१९५)

    विजयदेव झाक ड्रग एडिक्ट बला भ्रष्ट-अशुद्ध अंग्रेजीमे पठाओल अभद्र ई-मेल, पैरवीसँ पास करैक निशानी


    Vijay Deo Jha

    Mar 19

    to Gajendra
    Dear,
    Sri Gajendra Thakurji I am writing you this mail in response to sustained campaign by your close group forming E-Samadiya and others including Umesh Mandal and one ghost lady Priyanka Jha against me that I obtained assignment from the Sahitya Akademi. I have attached scanned copy of the reply of Sahitya Akademi in this regard. Dear sir, as your supported E magazine had published the report of an RTI indicating my name one who has obtained translation assignment that you people propagated some sort of Wikileaks. Dear Sir, your energetic team did not apply its mind to ascertain the fact of the assignment and thereafter. Though during the debate I found your esteemed literary colleague Priyanka Jha down to the gutter--she had neither the manner nor mind to enter into a debate of literary kind. I rest this matter here. But I will like you to publish this letter and my  version with same prominence the way I was targeted. I don't have mail id and phone number of Shree Umesh Mandal and Priyanka Jha to reply them. I mailed you also because of the reason that you have been in touch with these two.

    Regards

    Vijay Deo Jha

    Jun 4

    to Gajendra
    Dear Sir,
    Please refer to my previous mail along with attachment. I had requested you to give space to my statement in you E Samadiya blog against libelous content published against me regarding taking benefit from Sahatiya Akademi. I understand that you have a busy schedule in politics of literature apart from your job. I understand that you people are prone to forget to repair mistakes and nonsense delivery of allegation. Sir let me be very specific that you had leveled certain charges against me and I made my reply along with official communication received from SA. Don't you think that you should act as a gentleman to publish my version and the letter to clear my stand. Sir I am frivolous and flippant kind of person rather I am a very no-nonsense kind of people. You must be wondering that I am chasing you like anything over a petty issue. The charges you leveled against me could be petty in your consideration but for me it a serious matter. I am amazed that how person like you who is calmouring to be maker of Maithili Literature has been behaving shamelessly. Some two and half month back I had sent you the mail with the request. I had sent mail to Umesh Ji also. Your silence suggests you people are standing nowhere on the integrity index and how a so called intellectual and writer like you can be third rate cheat. I am also looking for that fantastic lady Priyanka Jha. Hadn't she been a lady I would have given her piece of my mind. Sorry for being harsh but you have forced me to be so.      
    29 AUGUST 2012 09.15 PM मैं इस बात के लिए खेद प्रकट करता हूँ की मेरी वजह से आपका लीटर भर खून जल गया होगा. आप और आपके अनुचरों की भाषा उस तिलमिलाहट को दिखाती है वैसे मुझे बहुत सारे सज्जनों ने फोन पर आपसे मूह न लगाने की सलाह दी क्यूँ की आपने किसी को नहीं छोड़ा है सब को गाली दी है ऐसे में मैं क्या. छोड़िये इन बातों को, मेरा मेल आप खूब प्रकाशित कर रहे हैं आप. मैं ने आपको एक और मेल भेजा था हिंदी में क्यूँ की मेरी अंग्रेजी या तो बुरी है या फिर आपके समझ से बाहर है. वह मेल भी प्रकाशित करें हाँ लेकिन ईमानदारी होनी चाहिए क्यूँ की मेरे ड्रग एडिक्टेड टेक्स्ट को आप अपने करप्ट एडिटिंग के द्वारा अपने लायक बना देते हैं. मूल सवाल यह देखने में आया है की आप मेरे सवालों को अपने ब्लॉग और साईट पर जगह नहीं देते. अगर आप वह मेल प्रकाशित कर दें तो मुझ जैसे मुर्ख के असलियत के साथ साथ लोगों को आप जैसे महान इंटरनेटी फेसबुकिया साहित्यकार के असलियत का भी पता चल जायेगा. आप एक महान फेसबुक साहित्यकार हैं आपका बस चले तो मैथिली के सारे साहित्यकारों का संहार कर दें. अपने सभ्य तमीजदार टीम और उसके भाषा में बारे में क्या ख़याल रखते हैं गजेन्द्र सर. अच्छा है की लोग उन्हें भी पढ़ रहें हैं. एक बात तो है की अगर साहित्य अकादमी में मैथिली न होता तो आप जैसे पैसा पीटने वाले लोग साहित्यकार बनने की कोशिश नहीं करते. आप किसी साहित्य की सेवा नहीं कर रहे हैं. जब आदमी पैसा कमा लेता है तो उसे यश कमाने की भूख लगती है लेकिन वह पैसे से नहीं कमाया जा सकता है ना सर. मुर्ख हूँ आपके शब्दों में लेकिन है यह है पते की बात. सर बहुत सीधा सा सवाल पूछता हूँ की आप इतना बड़ा ढोंग कैसे कर लेते हैं मसलन घोर ब्रामहण विरोधी आदि आदि. यह जो जातिसूचक टाईटिल आपने लगा रखा है उसे तो पहले हटायें फिर जनेऊ हटायें फिर यह सब बाचन करें. यह बात मैंने आपको पिछले बार भी पुछा था जब आप प्रियंका झा बन कर हम से पेंच लड़ा रहे थे. मैं आप के किस रूप की पूजा करू आप कब किस रूप में दर्शन देते हैं श्रीमान यह बड़ा गंभीर तत्व ज्ञान का विषय हैं. श्रीमान यह बताएं की जब आपको यह दिव्यज्ञान प्राप्त हुआ था की आपको साहित्य में भी हाथ आजमाना चाहिए उस वक्त आपकी उम्र क्या थी? क्या मेरे पिताजी के उम्र से अधिक या उनके बराबर. जबाब देने से पहले सोच लें क्यूँ की मेरे पिताजी (आपके शब्दों में बाप, यह आपका तमीज है) और आपके पूजनीय पिताजी हमउम्र ही होंगे. यह आप तय करेंगे की मेरे पिताजी साहित्यकार हैं या नहीं या आपका वह गुमास्ता आशीष तय करेगा? अच्छा आप एक बात बताएं बुरा न मानें तो क्या आपलोग अपने पिताजी को बाप ही कहते हैं. एक काम करें अपना मूह उठायें और थूकें और देखें की थूक कहाँ गिरता है आपके चेहरे पर या सूर्य पर. कौन सा डिबेट आप कर रहे थे आप? आपको इस बात की जानकारी भी नहीं होगी की मैं आपका बहुत बड़ा प्रसंशक रहा था मेरे पास आप के द्वारा पंजी प्रथा पर काम किया गया अद्भुत सीडी है जिसे मैं लोगों को दीखता था. लेकिन आपने अपने टुच्चे हरकत से मुझे तो ज़लील किया ही मेरा विस्वाश भी तोडा की आप सही में आदरणीय हैं. मुझे क्या पड़ी है की किसको अवार्ड मिले लेकिन आपने मुझे अपने घटिया राजनीति का शिकार बनाया. मेरे लिए सारे साहित्यकार बराबर हैं और सम्माननीय क्यूँ की वह साहित्य की सेवा कर रहें हैं. मैं ने पिछली बार भी आप लोगों को तभी रोका और टोका था जब आप लोगों ने मायानादं मिश्र को गन्दी गन्दी गलियां दी थी. लेकिन गाली गलौज करते हुए आप उस सीमा तक चले गए जहां आप जाहिल नज़र आते हैं और मैं किस जाहिल से बहस कर रहा हूँ? किसी का अपमान ना करें और किसी पर गलत आरोप न लगायें. आश्चर्य है की आप ने मुझे क्यूँ साहित्य अकादमी के विवाद में घसीटा जब मुझे पता ही नहीं की क्या हो रहा है ? एक अच्छे और ज़िम्मेदार व्यक्ति की तरह मैं ने अपनी सफाई दी थी और यह आशा किया की आप मेरी बातों को भी रखेंगे. लेकिन आप ने ये क्या किया? सर जी घटियापन की एक हद होती है और आपका वह हद कहाँ ख़तम होता है और कहाँ शुरू वह बस आप बता सकते हैं. यह मेल मैं आपको उत्तेजित करने के ख़याल से कतई नहीं लिख रहा हूँ. आप इसे पढ़े और मनन करें की आप कैसे कैसे अपने इज्ज़त का बट्टा खुद ही लगा रहे हैं क्यूँ की आपके बारे में लोगों के विचार सुन कर मैं सकते में पड़ गया. यह जीवन आपका है इसके मालिक आप खुद हैं. मैं तो बस आपके लिए प्रार्थना कर सकता हूँ ऊपर वाला मेरी बात सुने. आप मेरे बड़े भाई की तरह हैं. और हाँ यह सब मैं आपके चापलूसी के लिए नहीं लिख रहा हूँ. स्वभावतः मैं लड़ाकू नहीं हूँ लेकिन लड़ने से पीछे नहीं रहता. सादर चरण स्पर्श आपका अनुज विजय (हाँ आपको मेरे मोबाईल लोकेसन को ट्रेस करने के लिए मेहनत नहीं करनी चाहिए आपका मेरे ऊपर आपका स्वाभाविक अधिकार है जो किसी साहित्यिक इज्म से ऊपर है. यह मेरा आपको,लिखा गया अंतिम मेल है)

    ऐ महानुभावक vijaydeojha@gmail.com मूर्खतापूर्ण मैथिली (अशुद्ध)
    १०.०९.२०१२
    उमेश भाई प्रणाम पता चलल अपनेक श्रीमती जी पूनम मंडल जी एक टा पोस्ट लगौलनी आचार्य सुरेन्द्र झा सुमन के पुस्तक के ऊपर जाहि में लिखल गेले शेमलेस ग्रेंड फादर आ शेमलेस ग्रैंड चिल्ड्रेन एडिटर ओ शंकर देव जी आ हमर नाना पर लिखल गेल. औ उमेश जी कनिया एतेक अंग्रेजी बुझइ  छथिन. कहाँ दन कनिया सेहो एडिटर छथिन यौ भाई कुल सुधरि गेल अहाँ के अपनों एडिटर कनियों एडिटर.  एडिटरे एडिटर. अहूँ के सौभाग्य होईत जे अहाँ अहाँ के कनिया आ अहाँ के पिताजी तिनु गोटे एकटा किताब के एडिटरी करितों. होऊ मौक़ा भेटत गजेन्द्र महाकाव्य रचु ओकरा नोबल पुरस्कार भेटतै कतबो संपादकी करब लोक ओही में उप उपसर्ग नहीं लागत. हौ जी एकटा बात कहू अहाँ सब अपन पिताजी के बाप कहै छीयनि ई एही दुवारे पूछल जे पोस्ट में अहाँ बाप लिखे छियई. हमरा स अलगे रहू नीक होयत अपन जे दुकानदारी चलाबय के हो से करू जे भुकय हो से करू हमरा कोनो लेना देना नै. जानकारी भेटल जे हम कोनो पत्रिका निकालि रहल छी सेहो अहाँ के बिरुद्ध में. हमर  औकात की आब ई रही गेल जे हम ई करी सेहो अहाँ के बिरुद्ध. साजिश बंद करू. किछु जानकारी भेटल जाहि पर हम बिना खोजबीन के विश्वास नहि करब जे अपनेक ग्रुप के एकटा सज्जन दरभंगा में ककरो ई समाद देलखिन जे ओ हमरा बरबाद क देता यदि ई सत्य त एही माउथ डायरिया स बची. हम कोनो फलनमा के भौजाई नै छीये. हम कहलों जे हमरा लड़ाई में कोनो रूचि नै लेकिन जखन लड़ब त अंगद जेना पैर रोपि देब. फिलहाल अहाँ के निस्तुकी मंगवा लेलौं पढ़ खातिर. अहांके पहिल पुस्तक हम पढ़ब. जखन हम पहिल बेर अहाँ स गप केने रही तखन नीक लागल रहै लेकिन अहाँ के चरित्र बाद खराब निकलल एकदम कुटिल बला. हमरा मजबूर नै करू ई प्रार्थना आ एकरा हमर कमजोरी नै बुझल जाय. जिनका कोनो गोटे के हमरा द कोनो संसय छनि आ हमर औकात के कम आंकि रहल होथि हुनका हम बता दियनि जे हम साक्षात् बरवानल छी. हाँ इक्षा हो तो ईहो मेल के पोस्ट क देबै. शब्द अपने येह इस्तेमाल करब देलक रामदेव के मुर्ख बेटा धमकी.  ई हमर अंतिम मेल  अहाँ के.
    प्रणाम
    पुनश्च खूब लिखू हम पढ़ब आ आनो पढय. साहित्य सद्यः सरस्वती के सेवा थीक आ अहाँ सरव्स्ती के गारि पढि क प्राप्त करय चाहै छी.

    सादर

    ई मूर्ख विजयदेव फेर ई-मेल केलक (लिखने छल जे उपरका ई-मेल ओकर अन्तिम ई-मेल छिऐ!!!)
    अपडेट २३.०९.२०१२

    "राड़केँ सुख बलाय" केर लेखक रोशन कुमार झा रामदेव झाक बेटा, विद्यानाथ झा विदितक जमाए आ चन्द्रनाथ मिश्र "अमरक" नैत शंकरदेव झा-विजयदेव झाक संग मिलि कऽ एकटा ब्लैकमेलिंग ब्लॉग ई-पत्रिका मातृभाषा शुरू केलक अछि। आपके द्वारा किये पोस्ट के आलोक में
    आदरणीय उमेश मंडल जी पति पूनम मंडल साकीन निर्मली गुमास्ता गजेन्द्र ठाकुर नमस्कार मिथिला जिसमे आप ने मेरा नाम दिया है वैसे मैं बता दूं की मेरे जानाकरी में मैं ऐसे किसी भी पत्रिका से नहीं जुड़ा हुआ हूँ. उसने आपकी भी पोलपट्टी खोली है. आपकी यह बेहूदगी भरी भाषा मुझे किसी ने बताया की यह तब से हो गया है जबसे आपने भागाल्पुरिया के यहाँ गुमास्ते का काम करना शुरू किया. इस पर दिए पोस्ट में यह कहा गया है की आप ने अपने पिताजी को आकाशवाणी से लेकर कवि सम्मलेन तक में प्रमोट करवाने के लिए क्या क्या नहीं किया और इसी क्रम में अमलेंदु जी से आपका विरोध हो गया. कृपया अपने ऊपर लगे आरोपों के बारे में बताएं. मुझे यह पता है की आप तुरंत ही मेरे मेल को अपने फसदिया ब्लौग पर डाल देंगे वह भी मुर्ख उपनाम के साथ. लेकिन हे विद्वान संपादक कवि साहित्यकार निबंधकार, आलोचक नाटककार   और जो कुछ मुझ से छूट गया हो वह अपनी तरफ से जोड़ लें. मामला बाद विवाद तक था जिसे आप लोग गाली गलौज तक ले गए अब यह सुनने में आया है की (मैं तहकीकात  कर रहा हूँ इस बारे में) की आपके आलाकमान ने दरभंगा के एक साहित्यकार के पुत्र को मेरे बारे में यह कहते हुए धमकी दी की वह मुझे बर्बाद कर देंगे. क्यूँ और कैसे? अगर यह सत्य है तो यह निश्चय ही गंभीर बात है. उमेश जी (सिस्ताचार के नाते जी शंब्द का इस्तेमाल कर रहा हूँ) मैं गांजा और स्मगलिंग का धंधा नहीं करता हूँ गुरु. और मैं पंकज पराशर भी नहीं हूँ. और जिनके घर सीसे के होते हैं वह दूसरों के घर पर पत्थर नेही फेका करते हैं  बेहतर है की मेरे ऊपर हाथ डालने से पहले मेरे अतीत का पता कर लें भविष्य बेहतर रहेगा. मैंने आपको कहा था की मैं आपको फिर से मेल नहीं लिखूंगा लेकिन आपने मुझे मजबूर किया है. मेरे लिखे को सह्त्यिक निबंध ना समझें यह सलाह है गंभीर. बेहतर होगा की आप अपनी भाषा संयमित रखें  वरना खुल्ला खेल फर्रुखावादी औरों को भी आता है.




    आशीष अनचिन्हारकेँ फेसबुक मैसेजपर सेहो ई मूर्ख विजदेव मैसेज केलक
    एखने हमर फेसबुक मैसेजमे रामदेव झाक मूर्ख बेटा विजयदेव झाक मैसेज आएल अछि जे हम बिना काँट-छाँटकेँ दए रहल छी। ऐ मैसेजसँ अहाँकेँ ई पता लागि जाएत जे कोना रामदेव झा आ हुनक दूनू बेटा मने विजय देव झा आ शंकर देव झा गारि बलेँ मैथिलीकेँ बहुत दिन धरि ब्लैकमेलिंग केलकै। संगे-संग हम ईहो कहए चाहब जे ऐ ब्लैकमेलिंगमे रामदेव झा आ हुनक बेटा संगे मोहन भारद्वाज, महेन्द्र मलंगिया, चेतना समीति आ आर किछु साहित्यकार सभ अनवरत सहयोगी रहल छथि। मुदा आब जे विदेह आंन्दोलन भए रहल अछि ताहिसँ घबड़ा कए ई सभ अभद्रता कए रहल अछि। मुदा आब से चलए बला नै छै। तँ पढ़ू हुनक मूल मैसेज----

    हे रे अशीषवा, गजेन्द्र के पोसुवा, पतचटवा औकात देख क बात कर बालगोविन्द जनामि क ठाड़ भेलौं ने की कहै जे छै नबका जोगी के गांडी में जट्टा


    Vijay Deo Jha
    Oct 29 (1 day ago)

    to Gajendra

    दू गो बात सर 
    गजेन्द्र बाबु हम अपने आ अपनेक रामचेलवा के कमेन्ट पढ़ल। नीक लागल जे हमरा अपने एडवाजरी बोर्ड में मेंबर हेबाक योग्य बुझल। चलू लागले हाथ हमहूँ अहाँ के महान साहित्यकार कहि देलौ। लेकिन एकटा बात हम कहि रहल छी आ एही बात के हम वीणा जी के सेहो कहबनि जे अपने पर मोनोग्राफ जरुर लिखल जाय। अपने बड़ पैघ आ महान साहित्यकार छी सरकार आ उत्तम किस्म के थेथर सेहो। कोन बुद्धिये पोस्ट में हमर नाम देलियई सरकार। आप भी सर हद्दे करते है सब चीज़ को कस्टम का माल समझ लिए हैं। और ई सब जो ढोंग करते हैं जाति वाला तो पहले अपना टाईटिल हटाईये। अपने बेटा के जनउ में जो लाख टाका बुके थे और बभना सब को खिलाये उसका हिसाब भी दीजिये ना और हम सब तुच्छ प्राणी को ज्ञान दीजिये प्रभु की जब आप सचमुच में जाति के विरोध में हैं तो बेटा के कन्धा पर धागा काहें टाँगे गुरु। मतलब पुरे मिथिलांचल में एक आप ही भगल्पुरिया कबिलाहा है ये सब पैतराफोकासी उमेश जैसे लोगों को दीजिये गुरु। और गजेन्द्र बाबु कुछ दिन पहले तक तो आपही अजीत आज़ाद जी को गरिया रहे थे अब दोस्तियारी कैसे हो गया। आप घिना दिए गुरु। इसको पोस्ट कर दीजियेगा एक दम लाइन बाई लाइन।       
    SATISH VERMA LIKHAI CHHATHI...Satish Verma Isi Bhagwa Shankardev jha ko maine bahut pahle apne lekh me khub lapeta tha. Darsal Agnipushp sampadit samvad patrika me Gujrat danga aur Narendra modi ke role par meri ek kahani chapi thi,jis par usne badi hi behuda tippani ki thi,jiska jawab maine rachna,darbhanga,vishwanathjee ke patrika ke jariye diya tha.shunt ho gaye the shankardev babu,aukat nap gayi thi unki.

    VINIT UTPAL..LIKHAI CHHATHI ..
    Vinit Utpal क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पर गरल हो, वह क्या जो दन्तहीन, विषहीन और अत्यंत सरल हो.गाली देब परम्परा अछि. जिनकर जेहन संस्कार, हुनकर मुंह से तहिने बोली.रचनात्मकता में जीवन अनुभव के बड़ रास योगदान होयत अछि. फेर संस्कार ते घर से भेटैत अछि. अशीषवा,पोसुवा, गांडी, जट्टा एहन शब्द अलंकारक प्रयोग करहिक अर्थ अछि जे अखनो लोक में आदिम संस्कार से जुडल अछि. ई सब शब्द साहित्य से दूर भ
    रहल अछि. ताहि सं विजयदेव झा सहित तमाम मैथिली से जुडल अहिने प्रबुद्ध लोक सें आग्रह जे अहां सब शब्दक संगे आओर एहिने शब्दक प्रयोग क मिथिलाक शब्दकोष के समृद्ध करल जाय. कियाकि तथाकथित ब्राहमणवादी साहित्यकार घर में ते एहन शब्दक प्रयोग करैत छथिन आ अप्पन नेना सभ के सिखाबैत अछि मुदा अप्पन लेखनी में प्रयोग
    नहि करैत अछि.
    रामदेव झा, शंकरदेव झा आ विजयदेव झा:ब्लैकमेलर फैमिलीक आज अखबारमे निकालल न्यूज

    रामदेव झा, शंकरदेव झा आ विजयदेव झा:ब्लैकमेलर फैमिलीक आज अखबारमे निकालल न्यूज 

    रामदेव झा, शंकरदेव झा आ विजयदेव झा:ब्लैकमेलर फैमिलीक आज अखबारमे निकालल न्यूज 
    रामदेव झा, शंकरदेव झा आ विजयदेव झा:ब्लैकमेलर फैमिलीक आज अखबारमे निकालल न्यूज आ
    wemaithils@gmail.com सँ स्पैम कएल गेल

    पूर्वपीठिका:


    -रामदेव झाक बेटा विजयदेव झा द्वारा फोन नम्बर +९१९४७०३६९१९५ सँ उमेश मण्डलकेँ धमकी

    -उमेश मण्डलकेँ देख लेबाक आ उठा लेबाक धमकी देलक विजयदेव झा

    -हालेमे साहित्य अकादेमी बाल साहित्य पुरस्कारमे प्रौढ़ साहित्यपर पुरस्कार ओकर पितयौत भाइ मुरलीधर झा केँ देल गेल, जकर घोर विरोध भऽ रहल अछि

    -विजयदेव झा गाड़ि-गलौज सेहो केलक



    -विजयदेव झा एक दिससँ सुभाष चन्द्र यादव, प्रियंका झा, प्रीति ठाकुर, प्रबोध नारायण सिंह, उदय नारायण सिंह नचिकेता, उमेश मण्डल, ज्योत्सना चन्द्रम, विभूति आनन्द, भीमनाथ झा, उषाकिरण खान, यात्री, शरदिन्दु चौधरी, सुधांशु शेखर चौधरी सभकेँ गरियेलक



    -ओ ईहो कहलक जे प्रीति ठाकुरकेँ बाल साहित्य पुरस्कार नै देल गेल, तेँ सभ विरोध कऽ रहल अछि, ऐसँ पहिने ओ फरबरीमे कहने छल जे जगदीश प्रसाद मण्डलकेँ मूल साहित्य अकादेमी पुरस्कार नै देल गेलै तँइ विरोध भऽ रहल अछि।


    -विजयदेव झा कहलक जे प्रीति ठाकुर, सुभाष चन्द्र यादव, नचिकेता, जगदीश प्रसाद मण्डल आ गजेन्द्र ठाकुर केँ ऐ जन्ममे ओ सभ साहित्य अकादेमी पुरस्कार नै प्राप्त करऽ देतै

    पीत पत्रकारिता

    रामदेव झा आ ओकर बेटा शंकरदेव झा/ विजयदेव झाक किरदानी- रामदेव झाकेँ उर्दू वर्णमाला नै अबै छन्हि मुदा साहित्य अकादेमी अनुवाद पुरस्कार उर्दूसँ मैथिली अनुवाद लेल निर्लज्जतासँ लेलनि/ ई लेख सभ अही ब्लैकमेलर फैमिली द्वारा कबिलपुरक ब्लैकमेलर पत्र विद्यापति टाइम्समे छपल!! आ ईहो असाइनमेन्ट साहित्य अकादेमीक छी जैपर अही ब्लैकमेलर फैमिलीक आइ धरि कब्जा छल!!!

    रामदेव झा आ ओकर बेटा शंकरदेव झा/ विजयदेव झाक किरदानी- रामदेव झाकेँ उर्दू वर्णमाला नै अबै छन्हि मुदा साहित्य अकादेमी अनुवाद पुरस्कार उर्दूसँ मैथिली अनुवाद लेल निर्लज्जतासँ लेलनि/ ई लेख सभ अही ब्लैकमेलर फैमिली द्वारा कबिलपुरक ब्लैकमेलर पत्र विद्यापति टाइम्समे छपल!! आ ईहो असाइनमेन्ट साहित्य अकादेमीक छी जैपर अही ब्लैकमेलर फैमिलीक आइ धरि कब्जा छल!!!

    रामदेव झा आ ओकर बेटा शंकरदेव झा/ विजयदेव झाक किरदानी- रामदेव झाकेँ उर्दू वर्णमाला नै अबै छन्हि मुदा साहित्य अकादेमी अनुवाद पुरस्कार उर्दूसँ मैथिली अनुवाद लेल निर्लज्जतासँ लेलनि/ ई लेख सभ अही ब्लैकमेलर फैमिली द्वारा कबिलपुरक ब्लैकमेलर पत्र विद्यापति टाइम्समे छपल!! आ ईहो असाइनमेन्ट साहित्य अकादेमीक छी जैपर अही ब्लैकमेलर फैमिलीक आइ धरि कब्जा छल!!!