Wednesday, May 6, 2026

गंगा ब्रिज

गंगा ब्रिज — पल्लव एक — मधुबनी ग्राफिक उपन्यास
गंगा ब्रिज
नाटककार: गजेन्द्र ठाकुर  |  मधुबनी-मिथिला शैलीमे ग्राफिक रूपान्तरण
❧   पल्लव   एक   ❧
ठक! ठुक! जय माँ गंगे!
दृश्य १मजदूर सभ गंगापुलक मरोम्मति करैत छथि। ठक-ठुक — पत्थर फोड़ाइ आ ढोल। किछु मजदूर "जय माँ गंगे!" कहि गंगाकेँ प्रणाम दैत छथि।
सुनै जाउ, सुनै जाउ! गंगा ब्रिज... मजदूर चाही। स्त्री-पुरुष, बाल-वृद्ध सभ।
दृश्य २ढोलहो देनहारक प्रवेश। ढोल दैत घोषणा — "गंगा ब्रिज... पवित्र गंगापर बनल ऐ पुलक मरोम्मति लेल मजदूर चाही!"
काज तँ चलिये रहल छै — तखन फेर मजदूर किए? मजगूत बना देतै तँ मरोम्मतिक ठेका कोना भेटतै!
दृश्य ३दुनू लोक व्यंग्यसँ बजैए — "मजगूत बना देतै तँ मरोम्मतिक ठेका कोना भेटतै हौ?" — भ्रष्ट व्यवस्थाक स्वर।
१५ अगस्त — स्वतंत्रता दिवस झण्डा फहराइत रहए ओइ लेल हमरा सभकेँ जोर लगाबैत रहऽ पड़त! हम सभ वचन दै छी — ऐ देशक नव इतिहास लिखब!
दृश्य ४ — १५ अगस्त १९४७बच्चा सभ त्रिवार्णिक झण्डा लऽ कऽ अबैए, शिक्षक आगाँ-पाछाँ। उल्लास आ प्रेरणाक वातावरण। बच्चा सभ वचन दैत छथि — "हम सभ पूरा इमानदारीसँ ऐ देशक नव इतिहास लिखब।"
पुल बनाएब! चिमनी बनाएब!
दृश्य ५बच्चा सभ सपना देखैए। बच्चा १ — "हम इन्जीनियर बनब, पुल नहर बनाएब!" बच्चा २ — "हमरा बड़का-बड़का चिमनीक धुँआ बड्ड नीक लगैए!"
ई पुल एत्ते हिलि रहल अछि जत्ते कठपुलो नै हिलैए! — अभियन्ता हिल!
दृश्य ६अभियन्ता (जे बच्चा १ थिकाह) कुर्सीकेँ झमाड़ैत — "एना हिलि रहल अछि ई गंगा ब्रिज। वन-वे भऽ गेल अछि। अदहा पुलपर मरोम्मति!"
बदली आदेश दरमाहा बन्न कमीशन — नेता, इन्जीनियर, गुण्डा सभकेँ देबाक छै। बालु चाललौं तँ तोहर बदली भऽ गेलौ, दरमाहा बन्न भऽ गेलौ, बच्चा गाम गेलौ! जखन तोरा सन चीफ इन्जीनियर आबए — तखन फेर बालु चालब... बालु
दृश्य ७ — पर्दाक पाछाँठिकेदारक स्वीकारोक्ति — "बालु चाललौं तँ तोहर बदली भऽ गेलौ, दरमाहा बन्न।" अभियन्ता — "जखन तोरा सन चीफ इन्जीनियर आबए तखन फेर बालु चालब।" डंकाक अबाजक संग पर्दा खसैए।


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