गंगा ब्रिज
❧ पल्लव एक ❧
दृश्य १मजदूर सभ गंगापुलक मरोम्मति करैत छथि। ठक-ठुक — पत्थर फोड़ाइ आ ढोल। किछु मजदूर "जय माँ गंगे!" कहि गंगाकेँ प्रणाम दैत छथि।
दृश्य २ढोलहो देनहारक प्रवेश। ढोल दैत घोषणा — "गंगा ब्रिज... पवित्र गंगापर बनल ऐ पुलक मरोम्मति लेल मजदूर चाही!"
दृश्य ३दुनू लोक व्यंग्यसँ बजैए — "मजगूत बना देतै तँ मरोम्मतिक ठेका कोना भेटतै हौ?" — भ्रष्ट व्यवस्थाक स्वर।
दृश्य ४ — १५ अगस्त १९४७बच्चा सभ त्रिवार्णिक झण्डा लऽ कऽ अबैए, शिक्षक आगाँ-पाछाँ। उल्लास आ प्रेरणाक वातावरण। बच्चा सभ वचन दैत छथि — "हम सभ पूरा इमानदारीसँ ऐ देशक नव इतिहास लिखब।"
दृश्य ५बच्चा सभ सपना देखैए। बच्चा १ — "हम इन्जीनियर बनब, पुल नहर बनाएब!" बच्चा २ — "हमरा बड़का-बड़का चिमनीक धुँआ बड्ड नीक लगैए!"
दृश्य ६अभियन्ता (जे बच्चा १ थिकाह) कुर्सीकेँ झमाड़ैत — "एना हिलि रहल अछि ई गंगा ब्रिज। वन-वे भऽ गेल अछि। अदहा पुलपर मरोम्मति!"
दृश्य ७ — पर्दाक पाछाँठिकेदारक स्वीकारोक्ति — "बालु चाललौं तँ तोहर बदली भऽ गेलौ, दरमाहा बन्न।" अभियन्ता — "जखन तोरा सन चीफ इन्जीनियर आबए तखन फेर बालु चालब।" डंकाक अबाजक संग पर्दा खसैए।


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